आंखों में ख्वाब थे जिंदगी जीने के लिए कोई गम ना था दुश्वारियाँ झेलने के लिए सोचा न था जिंदगी ये दिन भी दिखाएगी हम अपनो की लाश को तड़पते रह जाएंगे जीते जी मुर्दों के साथ रहकर इंसानियत रोयेगी सिलसिला यूं मौतों का कुछ और नहीं है दफन है जिंदगी अमानवीय क्रूरता तले इंसान भगवान नहीं जो खुद को तार ले चीखें गूंजती है विभत्सना देख मानव का दुनिया में महामारी का ग्राफ बहुत है मोक्ष की कामना फिजूल है करना मौत के बाद लाशों का गार्जियन कौन है शमशान में लाशों का ढेर है बहुत लाइनें वहां भी लंबी है अंतिम सफर में कितना डरावना है हकीकत -ए,-मंजर जीते जी इंसान का ठिकाना कहाँ है।।
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