एक समय की बात है मातंग मुनि तपस्या करने लगे भगवान को प्रसन्न किया भगवान प्रगट हुए बोले बोलो वत्स कैसे याद किया
मातंग मुनि ने कहा प्रभु मैं एक लंबी यात्रा की ओर जा रहा हूँ जहाँ मरूस्थल है दूर दूर तक पानी नहीं है यदि मैं मुझे प्यास लगे तो आपसे इतनी सी विनती है कि आप मेरी प्यास बुझा देना
भगवान ने कहा तथास्तु
मातंग मुनि मरूस्थल मे पहुंचे वहां ध्यान साधना करने लगे अचानक प्यास लगी भगवान को पुकारा उन्होने देखा दूर से गदहे पर सवार एक चांङाल चलकर आ रहा है उसके हाथ मे एक चमङे की मशक थी
मातंग मुन् मन ही मन भगवान को कोंसने लगे
चांङाल पास आया कहता मुनिवर आप पानी पी लिजिए मै बहुत दूर से चलकर आपके लिए आया हूँ
वो कहते नहीं नहीं तुम अपना जल ले जाओ मुझे प्यास नहीं लगी है
वह चांङाल चला गया
वहीं भगवान प्रगट होते और समझाया वत्स....
जिसे तुम चांङाल समझ रहे थे वास्तव में मैने इंद्र को बोला था मेरे भक्त को पानी नहीं अमृत पिलाकर आओ
इंद्र कहते प्रभु मृत्युलोक में अमृत ?
भगवान कहते हाँ मेरे प्रिय भक्त को अमृत पिलाकर आओ
वास्तव में मेरे आग्रह पर इंद्र यहाँ आए
मातंग मुनि को बहुत पश्चाताप हुआ
भगवान से क्षमा याचना किया
अंत में मातंग मुनि अमृत से वंचित रह गए॥
मोहे कपट छल छिद्र ना भावा
निर्मल मन मोहि अति प्यारा॥
इसलिए जातिगत भेदभावों से परे होकर समाज एवं राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए!
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