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नवंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्षणभंगुरता जीवन का

कौन किसका यहाँ जग पराया रहा ,पुत्र धन संपत्ति अंत संग न रहा जीते है सब यहां कुछ सवालों के संग ,रोजी रोटी मकानों का चर्चा रहा मद में फुले हुए हैं  दीवाने यहाँ ,किसी कोने में  चूल्हा भी बुझता मिला पाई पाई संजोया बुढ़ापा कटे, बेदखल कर कुपूतों ने धक्का दिया क्या मिला कोल्हू का बैल बनकर उसे,साथ अपनों ने उसके छलावा किया ठीक है जिंदगी ने सबक दे दिया ,रीत दुनिया का हमको पता चल गया कोई अपना नही छणभंगुर जहाँ, कुछ करम नेक दुनिया में करते भला ईश सदा सर्वदा संग तेरे रहा ,अंत भी वो तेरे साथ संगी रहा मेट ममता का नेह हरि को ही भजो, काट देगा करम जाल संसार का जीवन का सार सत्य, सत्य !सत्य !हरि नाम,भवतारण की संजीवनी हरि नाम औषधि है ये लौकिक जंजालों की,जीव जंजाल तारण की है औषधि सत्यनाम सत्यनाम सत्यनाम जपो रे मना सत्यनाम!

धर्म का सतपथ

युग आये युग बीते जाये, लोग सहस्त्र,करोड़ो आये हर युग में हुई धर्म प्रतिष्ठा  इश्वर धार मनुज तन आते लाख चौरासी जन्म मरण है ,स्थावर,नभ-और धरा है जन्म मरण का दुःख है दारुण ,बिछू डंक सा काल खड़ा है जिव जो माया में लिपटा है,अविनाशी जग भूल चला है इन नैनों में जग को निहारे ,मायापति का ये संसार माया ठगनी ठग ले जाये ,हरि से जिव बिमुख हो जाये दुनिया के सब काज न छोड़े, हरि का ध्यान वो भूल गया पापी जीव है निर्मल ईश्वर, जीव को भव से तार रहे माया में उलझाने वाले ,स्वयं धरा पर आते हैं महिमा किस विधि कहूँ  दयानिधि,नर नारायण हे वरदायक काल के ग्रास से तुम ही बचाते, सत्संगति से प्रीति बढाते निर्मल मन सत्संग श्रवण से, ज्ञान ध्यान वैराग्य से जीते काल को जीत के निर्भय होके, जीव परमपद को पा जाते सुनो दयालु भगवन मेरे,चरणों में नित प्रीत बढ़ाना विनय करू करबद्ध ह्रदय से,अपनी भक्ति ह्रदय में रखना अंत प्राण जो निकले देह से निर्मोही मन तुझको ध्याये होकर के लवलीन भक्ति में मिथ्या जग से दूर हो जाये।।

मुक्तक

★प्रेम ही प्रेम है जग मे  न पालो नफरतें दिल में पशु पक्षी वृक्ष फूलों से सीखो कुछ  हुनर खुद में विधाता ने विविधता से सजाया है जहाँ को खुद आदायगी करके ऋण अपना करो जन्नत जहां को तुम।। ★: प्रीत में ख्वाहिशें लाखों , जिंदगी है बहुत छोटी हसरतें दिल जो पाले हैं , नहीं उनका ठिकाना है यूं घुट घुट कर भी जीना क्या क्यों इतना गम बटोरे हो कि खुलकर आज को जी लो नहीं कल का भरोसा है ।। ★जो तुमको दिल से चाहे तो उसे दिल से लगा लेना ये रिश्ते कांच के जैसे खनक लगने नहीं देना झुका लो खुद को थोड़ा तुम अगर जो बात बन जाये गलतफहमी में अक्सर सच्चे रिश्ते टूट जाते हैं ।।  राजनीति को गंदली देखी नेताओं का आचार दिखा गुंडागर्दी, फीताशाही, भाई भतीजावाद दिखा मोदी अटल कलाम के जैसा नेता  नहीं हुआ देख लिया है बदलता भारत स्वच्छ राजनीति अभियान।। ★  कह दो हवा थम जा जरा , निष्प्राण हो जाए जहाँ विधि के विधान स्वभाव से , हर जीव  गुण धरता यहाँ ।। ये मीन भी चंचल बड़ी, प्रकृति वश गुण धर रही समझे जो इसके विधान को , समझे मेरी हर भावना  अंतिम मुकाम तेरा कहाँ , क्यों कर रहा अभिमान है नहीं जाना संग में ...

ईश कृपा

परमावतार हे दयानिधान , मिटे दुःख दारुण सर्वविकार पृष्ठों में अंकित है महान ,गाथा तेरी हे जगद्दाधार सर्वस्व तूँ तुझमें है सब सबमें समाहित एकाधार अवतारों की गाथा अनंत ,अनंत सुखदायिनी स्वरुप धर रूप नर लीला रचे , तेरा कर्म जग पीड़ा हरे तूँ ज्ञान है गीता तूँ ही , पतितों के पावन ईश तूँ ही अज्ञान तम हर लो हरी , तुमको नमन हे श्री हरि।। गायत्री शर्मा