परमावतार हे दयानिधान , मिटे दुःख दारुण सर्वविकार
पृष्ठों में अंकित है महान ,गाथा तेरी हे जगद्दाधार
सर्वस्व तूँ तुझमें है सब सबमें समाहित एकाधार
अवतारों की गाथा अनंत ,अनंत सुखदायिनी स्वरुप
धर रूप नर लीला रचे , तेरा कर्म जग पीड़ा हरे
तूँ ज्ञान है गीता तूँ ही , पतितों के पावन ईश तूँ ही
अज्ञान तम हर लो हरी , तुमको नमन हे श्री हरि।।
गायत्री शर्मा
पृष्ठों में अंकित है महान ,गाथा तेरी हे जगद्दाधार
सर्वस्व तूँ तुझमें है सब सबमें समाहित एकाधार
अवतारों की गाथा अनंत ,अनंत सुखदायिनी स्वरुप
धर रूप नर लीला रचे , तेरा कर्म जग पीड़ा हरे
तूँ ज्ञान है गीता तूँ ही , पतितों के पावन ईश तूँ ही
अज्ञान तम हर लो हरी , तुमको नमन हे श्री हरि।।
गायत्री शर्मा
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