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सितंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अहम के पर्दे कितने मोटे

अहंकार के पर्दे  ........................... देखो अहम के पर्दे  हो गए कितने मोटे मैं ही मैं की ध्वनि  सुन रहा हर कोई मैं हूँ सबसे दौलत वाला मैं हूँ सबसे शौहरत वाला मैं दुनिया में सबसे बङा दानी मेरे मैं मैं की चर्चा  हर दिशा में फैली है  सुनता हूँ जब मैं की चर्चा मन ही मन इतराता हूँ मैं ङाक्टर हूँ  मैं इंजीनियर  मैं अधिवक्ता  मैं वाचक हूँ मैं लेखक हूँ मैं नेता हूँ मैं ही मैं  सबकुछ मैं हूँ ओह ये क्या? अहंकार के पर्दे  देखो? सचमुच हो गए कितने मोटे चला गया तूं इस दुनिया से  राग अलापे मैं मैं करते काश तू समझ लेता अभिमानी मैं का पतन बहुत दुखदाई! मैं=अहंकार/अहम गायत्री शर्मा

ब्राम्हण कौन है?

ब्राम्हण कौन ? ब्रम्हा के मुख से उत्पन्न होने के कारण एक तरउ श्रेष्टता एवं दूसरी तरफ झूठ का प्रतीक ब्राम्हण को माना जाता है मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था आधारित सामाजिक जातिगत संरचना की व्याख्या है जिसके कारण हम अन्य वर्ण को नीचा दिखाते हैं ब्राम्हमत्व का खोखला राग अलाप करके ...! जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात् भवेत् द्विजः |  वेद-पाठात् भवेत् विप्रः ब्रह्म जानातीति ब्राह्मणः |   जन्म से मनुष्य शुद्र, संस्कार से द्विज (ब्रह्मण), वेद के पठान-पाठन से विप्र और जो ब्रह्म को जनता है वो ब्राह्मण कहलाता है ! केवल ब्राहमण के यहाँ पैदा होने से ब्राह्मण नहीं होता ! वास्तव में ब्राम्हण वही है जिसे शास्त्रों के साथ  ब्रम्ह का ज्ञान होगा वह ब्रम्हज्ञानी पुरूष ब्राम्हण होते हुए भी जातिगत संकीर्णता में न फंसकर वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से समाज को जोङने की ताकत रखता है ब्राम्हण वह है जो हाथी में चीटी में चांङाल में छुद्र में ब्राम्हण में क्षत्रिय में समान रूप से उस आत्मा को देखे ॥ यही फर्क है ब्राम्हण और ब्रम्हग्यानी में यदि हमारे महर्षियों ने पूरे विश्व को अपना परिवार माना तो...

पौराणिक कथा -मातंग मुनि अमृत से वंचित रह गए

एक समय की बात है मातंग मुनि तपस्या करने लगे भगवान को प्रसन्न किया भगवान प्रगट हुए बोले बोलो वत्स कैसे याद किया  मातंग मुनि ने कहा प्रभु मैं एक लंबी यात्रा की ओर जा रहा हूँ जहाँ मरूस्थल है दूर दूर तक पानी नहीं है यदि मैं मुझे प्यास लगे तो आपसे इतनी सी विनती है कि आप मेरी प्यास बुझा देना भगवान ने कहा तथास्तु मातंग मुनि मरूस्थल मे पहुंचे वहां ध्यान साधना करने लगे अचानक प्यास लगी भगवान को पुकारा उन्होने देखा दूर से गदहे पर सवार  एक चांङाल चलकर आ रहा है उसके हाथ मे एक चमङे की मशक थी  मातंग मुन् मन ही मन भगवान को कोंसने लगे  चांङाल पास आया कहता मुनिवर आप पानी पी लिजिए मै बहुत दूर से चलकर आपके लिए आया हूँ वो कहते नहीं नहीं तुम अपना जल ले जाओ मुझे प्यास नहीं लगी है  वह चांङाल चला गया  वहीं भगवान प्रगट होते और समझाया वत्स.... जिसे तुम चांङाल समझ रहे थे वास्तव में मैने इंद्र को बोला था मेरे भक्त को पानी नहीं अमृत पिलाकर आओ  इंद्र कहते प्रभु मृत्युलोक में अमृत ? भगवान कहते हाँ मेरे प्रिय भक्त को अमृत पिलाकर आओ  वास्तव में मेरे आग्रह पर इंद्र यहाँ आए  मा...

ग़ज़ल

अश्क आंखों में हो जरूरी तो नहीं कुछ नमी सा दिल में होना चाहिए गम ए सैलाब उमड़ना भी चाहे तो बेशक  दिल के तूफ़ान दिल में ही  थमने चाहिए आंखों से दिल का हाल जान लेते हैं  लोग दर्द के दरिया को थोड़ा सा झुकना चाहिए बेवजह तकदीर को यूँ कुसूरवार क्यों ठहराना जिंदगी के खेल को संजीदगी से समझना चाहिए  कि मेहनत के पटाखे ही फूटते हैं जलने वालों पर जीत के जश्न का पता दुश्मनों को होना चाहिए इस गफलत में न हो गुम कोई साथ देगा तेरा  गैरों से ज्यादा  खुद पर यकीन होना चाहिए शम्मा जलती है दूसरों के खातिर ही गुँजन कुछ नेकी कर दुनिया से विदा लेना चाहिए ।।