अहंकार के पर्दे ........................... देखो अहम के पर्दे हो गए कितने मोटे मैं ही मैं की ध्वनि सुन रहा हर कोई मैं हूँ सबसे दौलत वाला मैं हूँ सबसे शौहरत वाला मैं दुनिया में सबसे बङा दानी मेरे मैं मैं की चर्चा हर दिशा में फैली है सुनता हूँ जब मैं की चर्चा मन ही मन इतराता हूँ मैं ङाक्टर हूँ मैं इंजीनियर मैं अधिवक्ता मैं वाचक हूँ मैं लेखक हूँ मैं नेता हूँ मैं ही मैं सबकुछ मैं हूँ ओह ये क्या? अहंकार के पर्दे देखो? सचमुच हो गए कितने मोटे चला गया तूं इस दुनिया से राग अलापे मैं मैं करते काश तू समझ लेता अभिमानी मैं का पतन बहुत दुखदाई! मैं=अहंकार/अहम गायत्री शर्मा
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