ब्राम्हण कौन ?
ब्रम्हा के मुख से उत्पन्न होने के कारण एक तरउ श्रेष्टता एवं दूसरी तरफ झूठ का प्रतीक ब्राम्हण को माना जाता है
मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था आधारित सामाजिक जातिगत संरचना की व्याख्या है
जिसके कारण हम अन्य वर्ण को नीचा दिखाते हैं ब्राम्हमत्व का खोखला राग अलाप करके ...!
जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात् भवेत् द्विजः | वेद-पाठात् भवेत् विप्रः ब्रह्म जानातीति ब्राह्मणः | जन्म से मनुष्य शुद्र, संस्कार से द्विज (ब्रह्मण), वेद के पठान-पाठन से विप्र और जो ब्रह्म को जनता है वो ब्राह्मण कहलाता है ! केवल ब्राहमण के यहाँ पैदा होने से ब्राह्मण नहीं होता !
वास्तव में ब्राम्हण वही है जिसे शास्त्रों के साथ ब्रम्ह का ज्ञान होगा वह ब्रम्हज्ञानी पुरूष ब्राम्हण होते हुए भी जातिगत संकीर्णता में न फंसकर वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से समाज को जोङने की ताकत रखता है
ब्राम्हण वह है जो हाथी में चीटी में चांङाल में छुद्र में ब्राम्हण में क्षत्रिय में समान रूप से उस आत्मा को देखे ॥
यही फर्क है ब्राम्हण और ब्रम्हग्यानी में
यदि हमारे महर्षियों ने पूरे विश्व को अपना परिवार माना तो हम अपने परिवार के अन्य वर्ण सदस्यो के साथ भेदभाव करके अपना कल्याण सोचें तो यह संभव नहीं होगा
जैसे पानी में लकीर नहीं खियी जा सकती उसी तरह इंसान इंसान में फर्क करके अपना परलोक नहीं सुधारा जा सकता।।
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