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गांव सिर्फ याद के लिए हो गए

 शहर रोजगार के लिए हो गए गांव सिर्फ याद के लिए हो गए।। वो महुआ वो आम वो काफ़ल वो बगिया वो मचान वो पगडंडी यादगार हो गए शहर में अपने गैर और गैर मददगार हो गए संयुक्त परिवार का बिखेर रिश्तो में विक्षोभ हो गए।। बच्चे उड़ चले डिग्रियों के पर लगाए बुजुर्गों पर सितम ऐसा घर उजाड़ हो गए ।। ये पेट की भूख दाने दाने और निवाले को जूझना सरकारी नीतियां और दावे सब बेकार हो गए ।। गांव सिर्फ याद के लिए हो गए।।

मेरे सोणे पिया (श्रृंगार काव्य)

मेरे सोने पिया बात सुन ले जरा ,तेरे दिल में मेरा एक मुकां चाहिए वो जो श्रृंगार है प्रेयसी के लिए ,सारे सौंदर्य तुझसे आ मुझमें बसा तेरे बढ़ते कदम के कदमताल से ,मेरे जीवन में खुशियों की बरसात है सारे रिश्ते हैं गफलत के दर्द ए सितम, संग तेरे  इश्क मेरा मुकम्मल हुआ तूं जो संग हो कोई गम ठहरता नहीं ,एक बुरा दौर अश्कों से धुलता गया प्यार भिक्षा नहीं मांगो मिल जायेगा ,प्यार किस्मत से मिलता है जाना पिया मेरा कल तक जो था आज मेरा नहीं ,किंतु हर्षित हूं तेरे  सिवा और नहीं प्यार दिल की दुआ है दवा भी यही , प्यार ईश्वर की अनुपम वरदान है हर घड़ी प्यार खुद से भी ज्यादा करूं ,धर्म कर्म ज्ञान से हो समन्वय पिया ©®