शहर रोजगार के लिए हो गए
गांव सिर्फ याद के लिए हो गए।।
वो महुआ वो आम वो काफ़ल
वो बगिया वो मचान वो पगडंडी यादगार हो गए
शहर में अपने गैर और गैर मददगार हो गए
संयुक्त परिवार का बिखेर रिश्तो में विक्षोभ हो गए।।
बच्चे उड़ चले डिग्रियों के पर लगाए
बुजुर्गों पर सितम ऐसा घर उजाड़ हो गए ।।
ये पेट की भूख दाने दाने और निवाले को जूझना
सरकारी नीतियां और दावे सब बेकार हो गए ।।
गांव सिर्फ याद के लिए हो गए।।
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