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गोपियों के आगे उद्धव ने टेके घुटने

भक्ति का मार्ग है अति दुर्गम इंद्रिय विग्रह से मन सधे। काम क्रोध मद  लोभ का व्यापक जीवन पर प्रभाव पड़े ।। उद्धव ज्ञान महा गूढ़ ज्ञानी भंडार सहेजे  जो प्रेम भुलाए । हठ योग निमित कर्म से तर्क से बुद्धि ज्ञान में गोता लगाए।। भक्त का अहम शिखर पर  चढ़ा है चलो एक करतब तुमको बताएं। कृष्ण  बुलाएं उद्धव  पास  आओ  सुनो मेरी बात हृदय से लगाए।। ब्रज में है व्याकुल मात - पिता व्रजवासिन गोपियां प्राण हमारी। संदेश चिट्ठी ले जाओ सखा ज्ञान ध्यान  तर्क मानेंगी  तुम्हारी।। सीना तने  हर्ष हृदय भरे कहे  जो आज्ञा भगवन करूं शिरोधारी। ज्ञान बहुत रोम रोम भरा प्रेम विरह भुलाएंगी सब व्रजप्यारी।। गोपियां सुन के संदेश प्रभु के बिलखती हैं बरबस अश्रु बहाए। क्रोध अति करें गोपियां ज्ञान ,ध्यान नहीं मन मंदिर  समाए।। एक ही हृदय  नहीं दस बीस सभी कण कण में कृष्ण रमें। कहके गए थे मिलेंगे पुनः किंतु विरह की अग्नि में हम मिटें।। कृष्ण ही कृष्ण का राग लिए हर सुर में आलाप में कृष्ण जपें। ब्रम्हज्ञानी उद्धव देख ये भक्ति विचारें पुनर्जन्म स्थावरजंगम...