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अगस्त, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रश्नोतरी काव्य - अरिष्टासुर का वध

अरिष्टासुर का वध हे जगदीश्वर हे भुवनेश्वर भक्तों के रक्षक हे कृष्ण मुरारी, ब्रज मंडल पर संकट छाया कृपा कर  टारो विपदा भारी।। सुंदर चरितम , निश्चल भगवन, देवों के देव तुम्ही लीलाधारी, यदा कदा जब भीड़ पड़े हरते शोक , दुष्ट, महाप्रलयकारी।। योगमाया जग तुम्हहिं  रचाते रहें लवलीन योगी समाधिष्ट, खेल खेल में वृषभ भयंकर आयो  हरो जगदीश अरिष्ट ।। ब्रज के गोप गोपियां सारी गईया कृष्ण कृष्ण पुकारें, मित्रों  सखियों गईयों को देख के दौड़े आए कन्हईया प्यारे।। अरिष्टकारी असुर अत्याचारी अरिष्टासुर का प्रकोप है भारी, ब्रज में अत्यंत कोप  भयंकर, त्रस्त है व्रजवासी हे अंतर्यामी।। ग्वालों के खेल का नाश किया वो करो नाश वृषभ का हे त्रिपुरारी, कृष्ण कहें  धरो धैर्य  सखा शोक करना  नहीं  सुनो मेरी वाणी ।। मुस्काए मगन हुए श्री माधव, गोपियां गोपों के प्राण प्यारे, गोपाें को तटस्थ करके मुरारी भिड़े दुष्ट से जैसे काल पधारे। । पूंछ पकड़ अरिष्टासुर प्रभु  पवन वेग से धूल चखाए, दो कोंस योजन जाके गिरा , प्रभु दुष्ट को नाच नचाय संघारे ।। ज्यों ही शिला श्रीकृ...

मर्दवाद Vs नारीवाद (समीक्षा लेख सामाजिक)

मर्दवाद Vs नारीवाद विवादों की कड़ी में औरत , मर्द और हर आयु वर्ग के युवा , युवती शामिल हैं यह दोनो वर्ग एक लैंगिक पहचान होने से पहले मानव के रूप में अस्तित्व में हैं  कैसे ?? जब हम वैज्ञानिक दृष्टि से  दोनो को देखते हैं तो खून, मांस,  मज्ज़ा , अस्थि, मल मूत्र  में लिपटे एक मानव के रूप में जन्म लेते हैं ,और जन्म लेने की प्रक्रिया समान है ।  जब हम आदर्शवाद की नजर से देखते हैं तो त्याग करना करुणा , दया, उपकार, नीति - न्याय, मर्यादा, यह सब दोनो वर्ग में शामिल है तो फिर असमानता कैसी ??? यहीं से विवाद शुरू होता है महिलावाद के लिए समानता, स्वतंत्रता, और तो और ट्रेंड में चलने वाला एक  मेरा  देह मेरा अधिकार का सोशल मीडिया पर भरपूर समर्थन मिल रहा है।  दूसरी ओर आलोचना हो रही है कि नारी को नारी ही रहना चाहिए , वह पुरुषों से खुद को ना तोले, घर के काम करे, पति की पूजा करे , और बच्चो के पालन पोषण में ही नारीत्व का सुख देखे ।  यह सब बेतुकी बातें वही लोग कर रहे हैं जिन्हें डर है कि शिक्षित महिला अपने हक के लिए खड़ी हो गई तो उस पर अधिकार जताने की मर्दवादी...

साकार ब्रम्ह की महिमा

मेरी चाहत है मिले साथ तुम्हारा , अपनो का मिला साथ सही पर मैने देखा है नेमत सिर्फ तुम्हारा दुख दर्द में जब् कोई आगे आया उस शख्स् को मैंने फरिश्ता माना पूर्ण। किया हर काज को तुमने क्या कर्म दिखा मुझमें मेरे मौला हर वक्त तुझे मैंने करीब पाया एक एहसास है  तू कोई शून्य कहे त्रिनेत्र जो खोले वह प्रत्यक्ष कहे निज रूप है क्या ब्रम्हज्ञानी कहे नादान। तुझे निराकार कहें मूर्ति पूजन कोई सत्य कहे वह मूढ़ मति कोई क्या समझे चैतन्य प्रभु की भक्ति को तरसें त्रिदेव नारद और सनकादिक नर तन देवहुँ एक बार प्रभु मोक्ष मार्ग का है यह साधन कहे नानक जन है बड़भागी मानुष जन्म अपार मिला धन्य है जिसने नर तन पाया आदि नाम वह गुप्त है जिसको कृपा कर तुमने हृदय में लखाया बड़भागी मैने साकार को पाया साकार ब्रम्ह पर बलि बलि  जॉउ सत्य है........ राम बुलावा।  भेजिया , दिया कबीर रोय जो सुख साधु संगत में सो बैकुंठ न होय।।

श्राप वरदान है

 श्राप को हँसकर आत्मसात करना सीखो  क्योंकि.........   माता अंजनी को श्राप मिला बन्दरी बनने का तो संकटमोचन  दुद्रवतर की जननी का सौभाग्य मिला  श्राप मिला हनुमान को कि मतिभ्रमित हो जाओ तो राम की सेवा में  अपनी शक्ति का स्मरण हुआ । श्राप मिला जनक जी को पुत्र मोह में प्राण निकलने को तो अंतिम स्वांस राम नाम से मुक्ति धाम खुला  श्राप मिला अहिल्या को तो श्री हरि के  रामावतार में दर्शन और चरण स्पर्श का सौभाग्य मिला श्राप मिला शनि देव को कुदृष्टि का तो , निष्पक्ष न्याय का सिंघासन मिला  श्राप मिला चन्द्रमा को कुरूपता का तो  , अहंकार छोड़ने का ज्ञान मिला  श्राप मिला गंगा को पापियों से घिरे रहने का तो धरतीवासियों के उद्धार का द्वार खुला तुलसी से श्राप मिला तो श्री हरि शालिग्राम बनकर पृथ्वी पर सुलभ हुए  राजा परीक्षित को तक्षक नाग से डँसने का श्राप मिला तो  भागवद पुराण की महिमा का ज्ञान हुआ उत्तरा का गर्भ नष्ट करने पर अश्वत्थामा को श्राप मिला 3000 साल तक शरीर मे पिक और खून की बदबू के साथ धरती पर आम इंसान से दूर जिओगे और यह श्राप वरदान नही...

डॉक्टरों का कमाल हास्य काव्य

तू ही यमराज है तू ही धर्मराज है । रोगी के निदान में तेरा योगदान है ।। एनेस्थीसिया का असर समाधि सा हाल है। लोकल एनेस्थीसिया भांग चढ़ता कमाल है।। देखता औजार रोगी तनिक ना भान हो । आधा हिस्सा सुन्न पड़े बाकी चमत्कार है।।  बेहोशी के सुई से टांके वाले धागे से । चीरते शरीर मानो टेलर तू कमाल है।। दर्द से बेहाल हाल दवा से  मिले आराम ।  ड्रेसिंग कराने का झंझट बेहद दर्दनाक है ।। ट्रिगर पॉइंट पर रख के डॉक्टर रोगी को बुलाएं औजारों के ट्रिगर से करते घावों को खल्लास हैं।। मरहम पट्टी बेरहमी से कहते अपना काम है। सुई चुभोये  नस - नस कहते ऐलोपैथी इलाज है ।। नशा जब उतरता है तीनों लोक दिखता है । कमजोरी तन की भारी ' गुँजन 'हाहाकार है ।। सेहत का रखोगे ख्याल  रोग नहीं आएगा  पास। पिज्जा , बर्गर टाटा - बाय कंद मूल उपचार है ।। तू  ही यमराज  है तू  ही  धर्मराज है । रोगी  के इलाज  में  तेरा योगदान है ।।

साला जीजा की दुश्मनी कबीरा सारा रा रा

मैं साले को माफ ना कर सका तो,बीवी ने मेरी रिश्तेदारियां त्याग दी मैं भाई भांजों के साथ खड़ा रहा  तो बच्चों ने मुझसे बगावत कर लिया जिंदगी भर अड़ियल रहा मैं एक अपमान के कारण और साले के अपमान को मैं भूल ना सका अपने रिश्तेदारों के लालच धोखा तक को नजरंदाज किया और अपने ही ससुरालियों के दुर्व्यवहार को गुनाह मान लिया खूब नेकी किया रिश्ते नातों को निभाकर जानता हूं अपना घर मैं  संभाल ना सका कितना बेबस हूं आज किसी से कुछ कह नहीं सकता मर्द हूं खुलकर रो भी नहीं सकता मां की कसम हैऔर रोल मेरा उद्धारक का है इस खता से घरवालों की नजर में मैं विलन बन गया मत करना ऐ दोस्तों तुम ऐसी खता ज्यादा अच्छा बनने का हो शौक तो कोई बाबा ही बन जाना।।

पिता की रिश्तेदारियां

दूसरों पर खूब दिल खोलकर उड़ाते देखा ,पिता को बखूबी रिश्तेदारी निभाते देखा झूठे रिश्ता के दम पर ढींगे हांकते रहे इस कदर कि ,खुशामद के चक्कर में अपना घर बिगड़ते देखा पिता ने  कहा मायके ना  जाऊंगा ना जाने दूंगा ,मां से उनके ससुरालियों को खंगालते देखा दादी के अंतिम वचन साथ निभाना भाई भाभी का,इस आखिरी ख्वाहिश  से घर परिवार उजडते देखा मरने वाले विदा हो जाते हैं ख्वाहिशें बताकर,उन ख्वाहिशों के घुटन में जिंदों को मरते देखा पिता ने पूछा बच्चों  से तुम्हे तकलीफ क्या है ,रिश्तेदार ही तकलीफ हैं हमने खुद को घुंटते देखा माना कि फर्ज में रिश्तेदारी निभाना है जरूरी,  लोगों को खुश करते हुए अपनों को लाचार होते देखा

युथनेसिया (द प्रोसेस ऑफ डाइंग फ्रॉम सेल्फ विल )

युथनेसिया   (द प्रोसेस ऑफ डाइंग फ्रॉम सेल्फ विल ) स्वैच्छिक मृत्यु अर्थात  मैं समाधिष्ट प्राण त्यागने  के  आध्यात्मिक प्रक्रिया की बात  नहीं कर रही हूं यहां मसला है कानूनी तौर पर जीवन को खत्म करने की जायज़ मांग  । विदेशों में इस पर बहस है और कई देशों में स्वीकृति भी है पर हमारे भारत में धर्म और कानून आड़े आते हैं क्योंकि आत्महत्या (धारा 309 ) अपराध है धार्मिक तौर पर भी और कानूनी तौर पर भी  यानि आत्महत्या किसी भी एंगल से ठीक नहीं है । तो क्या हम  मान लें कि युथनेसिया अर्थात इच्छा मृत्यु /रहम पर मरने की अपील की मांग उचित है??? मेरे दिमाग में यह प्रश्न आता है कि  जब आप डॉक्टर को कहते हैं मुझे अब नहीं जीना , जहर  दे दीजिए , बच्चे घर में नहीं रखना चाहते, पति गुजर गया है , आय का जरिया खत्म है ,  मानसिक संताप है या ससुराल में, कार्यस्थल में मानसिक संताप की स्थिति है जो बेहद  असहनीय है  , यदि आप यह डॉक्टर को कहेंगे तो वह   क्या आपको जहर दे सकता है ??  नहीं ... कभी नहीं ..! ! ऐसे मामले तो मनोचिकित्सक के दायरे मे...

श्रीकृष्ण द्वारा राधा को गोलोक की स्मृतियों को याद दिलाना

प्राणप्रिया , सुनो बालसखी,  मैं प्रेम निवेदन करता हूं , आंसू की धारा रोक लो तुम मेरे पथ में बाधक मानता हूं।। नहीं कहूंगा  निष्ठुर बनने को नहीं कहूंगा मुझसे रूठो तुम,  जरा धैर्य धरो मैं कहता हूं अब विचलित ना हो जाना  तुम।।  राधा के मन में हलचल है  अंतस तूफान  भयंकर है , नयनों से प्रश्न छलकते हैं शंका मन राधे निरंतर है ।। मां राधा कठिन परीक्षा दे तो विधाता कटघरे प्रश्न घिरे , कान्हा बोले  हतप्रभ ना हो ,तुम अयन से करो विवाह प्रिये।। राधा बोली क्या पाप किया जो  स्वयं से दूर किया मुझको, इस मृत्युलोक पर आने  की  यही सजा दिया तुमने मुझको।। तुम स्मरण करो गोलोक प्रिये श्रीदामा संग जब उलझी थी,  दोनो ने श्राप श्राप खेला तब मति क्रोधाग्नि में झुलसी थी।। निर्धन ब्राम्हण का श्राप लगा श्रीदामा भूलोक में दुखी रहा, तुम शत वर्षो का विरह सहो उस श्राप से  बिसरी स्मृति रही ।। हम दोनो  का प्रेम अमरता है संग हो ना हों मन  तार जुड़े , अज्ञानतावश  दो शरीर कहे वह प्राणी नर्क के द्वार  पड़े।। मेरा मत अकाट्य समझना तुम मानव लीला मे...

रक्षाबंधन पर पितृसत्ता का बंधन

राखी मिठाई कपड़े लत्ते त्योहारों पर  काज,   देखो घर आई है बहना लूट ले जायेगी आज।। बेशक लूटें बहन की संपत्ति और भरी हो तिजोरी, जोर जोर से भाई चिल्लाएं आएंगी बहनें लुटेरी।। दौलत भाई विरासत पाएं बहनें किस्मत की मारी रहीं, बहने घर आए तो सहमें जेबें अपनी खाली रही ।। भाभी बोली दीदी आई  किससे लेंगे उधार जी, बस थोड़े  ही देर में दूजी बहना घर पर पधारे जी।। भईया बोले सुनो हे प्रिये , खर्चा लूंगा बचाय, बस तुम मेरा कमाल देखना बीवी गई लजाय।। बोली प्रियवर कितने शातिर चला है तुमने चाल, बहनों के आगे दुखड़ा कह खर्चा लिया बचाय ।। बहनों का संसार न अपना खाली हाथ ससुराल आईं, पिता के संपत्ति त्याग के बहनें हिस्सेदारी भूल गईं ।। कानाफूसी करते हुए भाभी की बात को सुन बहना , अपमानों के विष को पीकर इज्जत से कहती भईया ।। मान गई दोनो बहने क्या खाक करेंगे रक्षा भाई, मां बाबूजी याद आते हैं आंसू छलकाई बहना ।। मन में पीड़ा हंसता चेहरा भाई को राखी बांध दिया, अपमानो के वार को सहकर फर्ज बहन ने निभा दिया।। रक्षाबंधन का त्योहार तुम्हे मुबारक हो खुशियां भाई भाभी साथ निभाना मेरा क्या अ...