श्राप को हँसकर आत्मसात करना सीखो क्योंकि.........
माता अंजनी को श्राप मिला बन्दरी बनने का तो संकटमोचन दुद्रवतर की जननी का सौभाग्य मिला
श्राप मिला हनुमान को कि मतिभ्रमित हो जाओ तो राम की सेवा में अपनी शक्ति का स्मरण हुआ ।
श्राप मिला जनक जी को पुत्र मोह में प्राण निकलने को तो अंतिम स्वांस राम नाम से मुक्ति धाम खुला
श्राप मिला अहिल्या को तो श्री हरि के रामावतार में दर्शन और चरण स्पर्श का सौभाग्य मिला
श्राप मिला शनि देव को कुदृष्टि का तो , निष्पक्ष न्याय का सिंघासन मिला
श्राप मिला चन्द्रमा को कुरूपता का तो , अहंकार छोड़ने का ज्ञान मिला
श्राप मिला गंगा को पापियों से घिरे रहने का तो धरतीवासियों के उद्धार का द्वार खुला
तुलसी से श्राप मिला तो श्री हरि शालिग्राम बनकर पृथ्वी पर सुलभ हुए
राजा परीक्षित को तक्षक नाग से डँसने का श्राप मिला तो भागवद पुराण की महिमा का ज्ञान हुआ
उत्तरा का गर्भ नष्ट करने पर अश्वत्थामा को श्राप मिला 3000 साल तक शरीर मे पिक और खून की बदबू के साथ धरती पर आम इंसान से दूर जिओगे और यह श्राप वरदान नहीं बन सका।
गर्भ नष्ट करने की सजा कितनी कठोर है काश ये कलियुगी मानव समझ जाएं
श्राप और वरदान के चक्रव्यूह से क्या हम आजाद हो पाए ।।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें