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जुलाई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्र हितों को ऊपर रखना संविधान मुस्काएगा

टुकड़ों में हम बंटे हुए हैं शुद्र , नारी कर भेद , अस्पृश्यता, अमानवता से ईश्वर को है खेद।। धर्म नहीं नफरत का घोतक सभी को दे सम्मान, धर्म की परिभाषा ना कदापि नारी का अपमान।। पुरुष प्रधान की वेद ऋचाएं,  नारी मन को पढ़ ना पाए देव ऋषि नारी पर  मोहित  लंपट कामी वो कहलाए ।। इंद्र, चंद्र , बाली , रावण छल कर नारी अस्मिता हरे , परमेश्वर पति उपमा पाकर युगो युगों तक भ्रमित करे।। वैश्या , विधवा, बांझ , कुलक्षिणी शब्द उजागर किए है वो, विधुर, नपुंसक  , लंपट , कामी ,  इंद्रिय दोष को ढंकते जो ।। स्वर्ग नर्क भय मति भ्रमित  कर  धर्म को कट्टर दिखलाते, अति सरल है धर्म का वर्णन , हम  इंसान ही बन जाते ।। करो धर्म जप तप व्रत पूजा वैदिक  अनुष्ठानों के संग , व्यक्तिवाद, स्वतंत्र विचार पर  चढ़े सभी का अपना  रंग पुरुषवाद के महिमामंडन से नारी को ना छलना , परिभाषा वह स्वयं गढ़ेगी नारीसत्ता से ना डरना ।। पूजा पाठ करो बेशक  ईश्वर को अलंकृत उपमा हो , सहनशील, अबला, बेचारी शब्द कदापि ना स्वीकृत हो।। जातिवाद की जड़े मिटा दो , नास्तिकता मिट जाय...

प्रश्नोत्तर काव्य - कालिया नाग को मारने के बाद कृष्ण द्वारा दावानल से गाय और गोपों की रक्षा

 प्रश्नोत्तर काव्य - कालिया नाग को मारने के बाद  कृष्ण द्वारा दावानल से गाय और गोपों की रक्षा  ब्रज मंडली भय त्रस्त है  अग्नि प्रकोप भारी पड़ी ,  इक कालिया का भय  मिटा संकट निकट दूजा खड़ा।। अन्न जल  बिन त्रस्त हैं सब ग्वाल बाल श्रीकृष्ण संग ,  शैय्या धरा तट यमुना का बेसुध सोएं सब ही बेढंग ।। हाय ! ज्वाला ये दहकती ढाए कहर चहुं ओर से , लपटें लिपटतीं फैलती  ललकारते प्रभु जोर से।। करुणानिधान लीला अपार बल शौर्य दाऊद, कृष्ण का, केवलमात्र ग्वालों की आस अग्नि बुझे  वन क्षेत्र  का ।। बाल भक्त सब ग्वालन पीड़ित  कर रहे त्राहिमाम,  आंख मूंदकर ग्वाले सभी कृष्ण को किए प्रणाम।। नीलकंठ  सम दयालु गिरधर धरें  अग्नि मुख मांहि , पलक झपकते ग्वाले , गईयाँ भांडीर वट पर जाहिं।। रामावतार में सीता सुरक्षा किए थे अग्निदेव , मुख में आश्रयस्थान लिए कृतज्ञ रहेंगे सदैव।। श्री कृष्ण है त्रिलोकेश्वर सत- रज - तम गुण से परे  माया अपार महिमा अपार सुर - असुर- नर जिसने रचे ।। धर्मो रक्षती रक्षित का  ज्ञान पुंज  प्रज्वलित करे ।। वही दैत...

राष्ट्र की एकता में धर्म की परिभाषा !

 देश सदियों से प्रथाओं, आडंबरों ,जातिवाद, छुआछूत में फंसा है  जबकि वर्ण व्यवस्था जैसी कोई चीज होनी ही नहीं चाहिए थी  वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो हर इंसान एक ही प्रक्रिया से होकर जन्म लेता है और माता के गर्भ में मल मूत्र से लिपटा हुआ बाहर आकर  खुद को वेदों के ज्ञाता कहकर समाज की कमान अपने हाथों में rkh  लेटे हैं और शास्त्रों का हवाला देकर समाज के मानसिकता को कमजोर बनाया जाता है इसलिए लोग धर्म से विमुख हो रहे हैं , नास्तिक हो रहे हैं किंतु धर्म जो मानवता को एक धागे में पिरोता है वह धर्म कभी दूषित नहीं था  बस एक वर्ग विशेष ने खुद को धर्म का ठेकेदार  बना दिया और आज भी  हमारी रगो में जातिवाद, खून खराबा, वैमनस्यता, आरक्षण विरोध, या आरक्षण के पक्षधर मिलकर लड़ रहे हैं ऊपर से कहा जाता है कि देश एकजुट रहे तो कोई भी  पड़ोसी मुल्क हमला नहीं कर सकता।  मुझे लगता है धर्म की नई परिभाषा होनी चाहिए ।   ✓कोई आपका हक छीने तो आवाज उठाओ ✓महिलाओं को मानसिक गुलाम बनाए तो यह सोचकर चुप ना रहो कि नर्क मिलेगा कृष्ण ने मामा, और बुआ के बेटे का वध करके अन्याय के...

प्रश्नोत्तर काव्य - नंद और वासुदेव जी का मिलन

प्रश्नोत्तर काव्य - नंद और वासुदेव जी का मिलन भ्राता मिलन की चाह लेकर नंद मथुरा को चले   कर कंस का चुकता किये वसुदेव पीड़ा मिल कहे  झरझर बहा पावन अश्रु  निष्प्राण दोनों ही खड़े  अन्तस् सराहे भाग्य को  कर दोनों के कर में पड़े  प्रेम से हृदय लगे मिल भ्राता उपजा  हर्ष विशेष शोक सन्ताप नहीं उर उनके अब क्या रहा अशेष हरिमाया को प्रबल ही जानो पुत्र वियोग  सहा ना जाये  कुशलक्षेम कहो नंद कृष्ण की  हरि की लीला समझ ना आये पुत्र चाह की थी  उत्कंठा उम्र तुम्हारी ढलती आई  किस्मत के तुम धनी हो भाई पुत्र सन्तति आखिर पाई  हम अपना सौभाग्य ही जाने दुर्लभ मिलन अति हर्षाये सृष्टि चक्र  यह  क्रीड़ास्थल है मानो पुनर्जन्म हम पाये  सगे सम्बन्धी प्रियजन अपने सदा सर्वदा साथ ना रहते  पाप पुण्य का संग्रह जीवन हम अपना प्रारब्ध समझते  कहो वृक्ष, पशु आश्रय स्थान वहाँ सदा अनुकूलता रहता मेरे पुत्र को पाला तुमने यशोदा को क्या माता कहता  चिंता बड़ी गहन है भीतर स्वजनों संग प्रीति घनी  तनिक सुखों की लालसा में अनीति कर्म हितका...

स्वप्न शास्त्र - आईने वाला चेहरा

आईने वाला चेहरा स्वप्नशास्त्र आईना और चेहरे की बड़ी  गहरी मित्रता है जिस प्रकार मधुमक्खी को पराग , तितलियों को पुष्प,चातक को स्वाति नक्षत्र और मयूर को नृत्य पसंद है ऐसे ही आईना को मुस्कुराहट  भाता है  चूंकि आईना भी सजीव है जो रोज सुबह खिल जाता है एक प्यारी मुस्कान से , चेहरे को देखकर किंतु...............! ये क्या  कमल अपना चेहरा देखने का प्रयास कर रहा है वह बहुत दुखी नजर आ रहा है और ऑफिस जाना भी जरूरी है उसके लिए , आखिर बैठकर पेड़ से पैसे तो नहीं बरसेंगे ......' उसे जल्दी निकलना है । सफेद कुर्ता, काला पेंट पहने , लाल टाई बांधे हुए सिर के बाल किसी जेल से सेट करके डैशिंग पर्सनालिटी में हाथ में आईना लेकर खड़ा  है और सोच रहा है । लेकिन इतनी जल्दबाजी में किसको आईना से बात करने का समय है ? कमल के मन में हलचल  चल रही थी जैसे एक शांत समंदर कब विकराल रूप धर ले , नदी कब बागी हो जाए , ओलावृति कब फसलों का काल बन जाए , कमल के मन की हलचल भी कुछ अलग नहीं थी  तभी उसे एक परछाई दिखी ।  जैसे वह  उसे कुछ कहना चाह रही हो  कौन है वो  जिसे ...

प्रश्नोत्तर काव्य - यमुना तट पर बाल कृष्ण और बाल राधिके की मीठी झड़प

प्रश्नोत्तर काव्य - यमुना तट पर बाल कृष्ण और बाल राधिके की मीठी झड़प खिली हुई चंपा के जैसे अंग सुकोमल जिसके भाए, नख से शीख तक  देख राधिका कृष्ण को तंज कसे ही जाए।। कहो ऐ बालक प्रश्न क्यों करते यमुना तट पर हम क्यों आए, सुनो ! मां यमुना हैं हम सबकी  प्रश्न तुम्हारा नहीं सुहाए ।। भ्रम में तनिक ना रहना ग्वाले बातों में ना  राधा आए, खड़े हैं आतुर उत्तर  हेतु कृष्ण ' राधिका देख मुस्काए ।। सौंदर्यजगत के पुष्प हैं दोनो कामदेव  जिन्हे देख लजाएं, नीलकमल सी नैनो वाली राधा रानी अड़ी ही जाए ।। प्रश्न पूछकर घिरे हैं कान्हा खरी खरी खड़े सुनते जाएं, नैनो से मिले नैन कान्हा कहें ' बालिके  क्रोध ना तुम पर भाए।। चंचल यमुना वायु तरंगे वस्त्र उड़े हैं पायल थिरके, नाकों के नकबेसर सुंदर चंपा अंग वायु से महके।। बलखाती मदमाती चाल नागिन जैसे  जिसके बाल, पारिजात गल माला सोहे अंजन नैन  हठीले चाल।। मोहपाश में फंसे हैं कृष्णा जिनपर जग न्यौछावर रहता, राधा - कृष्ण हैं बंधन तारण जग बुद्धि से जान ना सकता।। यमुना  की शीतल सी तरंगे तट से टकराती इतराती, चंद्रमु...

राम दरबार (दोहावली काव्य)

द्वादश गृह है जन्म कुंडली स्थिर हैं लग्नेश कुछ दलबदलू गोचर ग्रह अतिथिगण बन करें प्रवेश आज उपाय एक करना है दूजा कल पर टाल ऐसे ही भय ग्रहों से खाकर होता है बुरा हाल शनि मनाऊं मंगल रूठे , किसके आगे किसको पूजे पीपल  पूजूं  शम्मी को पुजूं  अब तो चंदा मामा रूठें कुंडली माहीं खोट यद्यपि ग्रहों की मिश्रित चाल एक दूजे को देख के जलते , करते है वाचाल साढ़े साती खौफ है भारी शनि हैं शिव के दास चंदा पर जब शनि कुपित हों मन को करें उदास चंदा जी शिव के प्यारे हैं  आभूषण बन सजे जटा शिव के अनन्य भक्ति से सुधरे चाल ग्रहों का उल्टा राहु केतु छाया बनकर देव ग्रहों को ग्रहण लगाए बिना मौत अकाल ही मृत्यु किसके कारण आए मंगल दोष अति घातक या नियति का है हाथ टारो विपदा दोष कटे अब हे हनुमंत दो साथ कौन है किससे सर्वोपरि राम हैं किसके आराध्य हनुमान शिव शम्भू करते हर पल किसका ध्यान प्रभु राम को हृदय में ध्याओ यही जगत का सार ग्रहों के मनके ,यंत्र -तंत्र का तनिक नहीं आसार राम ,रुद्र,हनुमंत हृदय धर ' गुंजन ' करे पुकार छोड़ - छाडि जग उलझन सारी पूजे राम दरबार ।। https://www.sahityarac...

स्वप्न शास्त्र - भव्य मंदिर के दर्शन

आज मौसम का मिजाज काफ़ी बेहतरीन रहा ,कितने दिनों बाद आज इंद्र देव के कमान से बादलों ने ज़मीं को तर कर दिया अक्रांत बोला"..!!  उसकी हां में हां मिलाते हुए विक्रम ने भी कहा..' और दिल को भी तर कर दिया ' ...!  हा.... हा...... हा...... हा....... दोनो ठहाके मारकर हंसने लगे   -"तेरा घर आ गया  अक्रांत ने कहा ... '' ! विक्रम  ऑटो से उतरा  ,घर पहुंचकर खाना खाया और किसी से बिना बात किए डिनर टेबल से उठ खड़ा हुआ, सबकी निगाहें विक्रम की  तरफ थी , ऐसा लग रहा था विक्रम कुछ बात ,हंसी मजाक करेगा पर वह चुपचाप वहां से खिसक लिया ।   अपने रूम में पहुंचकर घड़ी देखा जिसमे रात के 11 बज रहे थे  - ' शायद कुछ ज्यादा थकान भरा दिन रहा होगा ....!  "खैर कोई बात नहीं "...!! विक्रम के पिता कमलेश  मन ही मन सोचने लगे और वे भी अपने कमरे में चले गए । उधर जल बोर्ड वालों का धरना पिछले कुछ दिनों से  चल रहा था मुसीबत इतनी कि सभी को दूर दराज से पानी की व्यवस्था करनी पड़ गई ।   विक्रम घर का बड़ा है और किसी काम में आनाकानी  करता है तो अंत में मान ज...