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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुक्तक

सदवृतियों का अंत पद प्रतिष्ठा मान बड़ाई का हो भाव प्रधान जहाँ चुगलीबाजी और धृष्टता से मानव हो भ्रष्ट सदा ज्ञान गर्व से महा विदूषक सर्वश्रेष्ठता अहम् पले विनय नम्रता दया करुण सदवृतियों का हो अंत वहां।। ★संयुक्त परिवार पर भरा पूरा अगर परिवार हो खुशियाँ चौगुनी हो खुशी और गम में हों सब साथ धरती भी स्वर्ग सा हो  कौन कहता है एकल ही वही परिवार खुश रहते आपसी प्रेम हो दिल में संयुक्त परिवार खुश रहते ।। ★निस्वार्थ भावना पर किसी पर जान छिड़कूँ तो कभी उम्मीद ना रखती ,  निभाती हूँ जिन रिश्तों को सदा सहयोग करती हूँ   सामाजिक दोहरे प्रपंचों ,से खुद तटस्थ रहती हूँ मगर वंचित सामाजिक कार्य को सौभाग्य कहती हूँ ।। ★छल प्रपंच पर सरल दिखती हूँ पर मुझको समझना है नहीं आसां  घटाएं नभ में छाती हैं मगर बरसात होती क्या जो जैसा है उसे उसकी ही भाषा में समझती हूँ  चाल कोई चले हर बात का उत्तर मैं होती हूँ ।। ★परमार्थ पर सरल हूँ सहज हूँ अव्यक्त भावों का समन्दर हूँ  , सामाजिक रोष से कुपित सृजित उद्गार करती हूँ ,  विरोधी हूँ  कट्टरता की ,  सामाजिक दूरी रखती हूँ , ...

मन से हारो नहीं

मन से हारो नहीं मन से जीतो सदा धीरे धीरे सही बढ़ते जाओ सदा थाम ले जो अगर सहसों  का शिखर ध्वस्त हो जाये राहों का हर एक गम।।

ज्ञान निधि

भय नाशे दुर्मति हरे शिष्य को ऐसा तराश करे पूरे गुरु जिसको मिले जन्म जन्म भव त्रास मिटे दर्शन सेवा पुण्य प्रताप से जीवों के सब पाप कटे हृदय में धरकर ध्यान गुरु का भवसागर से पार उठे।।

गुरु शिष्य का नाता

अहंकार को तजकर जो निष्काम भाव भरपूर भरे अपने सुख को छोड़ कर गुरु सेवा में  लवलीन रहे अन्तस् आनँद की जननी है सेवा जो निष्काम है उस पर प्रसन्न हो जाये गुरुवर  हो जाए कल्याण है।।

सच्चा सद्गुरु

बिन बोले सब कुछ वो जाने भरम की काई दूर हटाये धर्म कर्म का ज्ञान कराकर पूर्ण समर्पित मार्ग बताए स्वाभाविक है इस जीवन मे सर्वसुखों का मिल जाना पर इतना भी सहज नहीं है सच्चा सद्गुरु मिल पाना ।।

सेवक की पहचान

चतुराई और लोभ लोलुपता का नहीं भाव प्रधान हो  प्रेमी हो वह सजल  हृदय से छल प्रपंच से दूर हो धूप छांव हो या संताप ये जीवन चाहे कठिन लगे डटा रहे वह कर्म के पथ पर कलुषित हृदय ना भाव हो वही है सेवक गुरु चरणों का  उस पर कृपा अपार हो। ।

भजन- तेरी रहमतें हम पर बरसने लगी

तेरी रहमतें हम पर बरसने लगी , भूलकर इस जमाने को रमने लगे एक नाता है तुझसे जुड़ा भाव का , सारे झूठे प्रपंचों से हटने लगे तेरी कृपा  है सागर में मोती के जस जिसकों मिलता है सौभाग्य होता उदय तेरे गुणगान में ऐसी शक्ति छिपी दुनिया से अब विरक्ति का मार्ग मिला फूले हम  हैं समाते क्या किस्मत मिला नहीं दुनिया से कोई  रहा वास्ता जो भी वर मांगना है तुम्ही से कहें  हसरतें लाख करने से क्या फायदा दीन दुखियों की करके सेवा धर्म तेरे राहों पर चलने का मार्ग मिले कर चलें नेक कर्मों को दुनिया से हम अंत हो इस जन्म की विदाई सुखद।।

जनमाष्टमी गीत

आनंद छायो आयो  कृष्ण लाला मानवता का संदेश लाया धर्म ध्वजा को उसने  फहराया आनंद छायो........ लीलाएं उसकी देखे ये जमाना आत्मज्ञान का तोहफा लाया अपनी लीलाओं से जब को नचाया आनंद छायो........ दर्शन उसका दुख भी नसाया खुशियों की वह सौगात लाया आगमन उसका बड़ा ही सुहाना आनद छायो.......... लौकिक प्रेम से  अनन्त निराला ज्ञान पुष्प का बाँटनहारा निश्चय उसका हो जग कल्याण आनंद छायो........

भजन- तेरा रूप है जग से निराला

तेरा रूप है जग से निराला मेरे प्रभुजी दीन दयाला तूँ है भक्तों का प्रतिपाला मेरे प्रभुजी दीन दयाला निष्काम कर्म और पूजा मेरे जीवन का हो आधारा घट-घट  में समाने वाले मेरे प्रभुजी दीन दयाला हमको सन्मार्ग दिखाने आया है तूँ इस जहाँ में अज्ञानता हरने वाले मेरे प्रभुजी दीन दयाला संदेह नहीं है मन में भव  तारण की है बारी हृदय को बदलने वाले मेरे प्रभुजी दीन दयाला तेरा सुंदर रूप सलोना  मैं देख- देख मुस्काई नजरों में तुम्हे बसाया मेरे प्रभुजी दीन दयाला एक तार जुड़ा है तुमसे तुम बिन अब चैन कहाँ है चरणों का दे दो सहारा मेरे प्रभुजी दीन दयाला तेरी भक्ति जग से निराली , मेरा भाग्य  तुझे मैंने पाया हो भव भय हारने वाले मेरे प्रभुजी दीन दयाला ।।।

सुविचार 3

जिस प्रकार एक कछुआ खतरा सामने आने पर अपनेअंगो को अपनी ढाल में समेट  लेता है उसी प्रकार एक आत्मज्ञानी भक्त को संसार के माया रूपी खतरों से बचने के लियेप्रभु के नाम रूपी ढाल में अपनी बाहरी वृतियीं को समेट लेना चाहिए ।। भक्ति में बाधक है हमारा आलस्य ,  अत्यधिक् भोजन करना हमारे जीवन को विलासी बनाता है एक योगी को चाहिए कि वह अपनी समस्त ऊर्जा को अपने भीतर समेत  ले और सांसारिक पदार्थों को सीमित  रूप में धारण करे ।। मन की तीव्र गति भटकाव का कारण है सच्चे सद्गुरु के शरण मे आकर ही हमें भटकाव  से बचने का मार्ग मिलता है और दुर्लभ आत्मज्ञान की सिद्धि से प्राणी भव सागर  तर जाता है । ।

गीत -देवभूमि के प्रहरी

कितना प्यारा स्वप्न तुम्हारा दशकों से एक ख्वाब बुना देवभूमि उत्तराखंड का प्राचीनतम इतिहास रहा स्वप्न तुम्हारा  पर्वत की छाती पर छुक-छुक रेल चले देव लोक का मार्ग दिखाता उत्तराखंड समृद्ध बने।। प्रकृति की छटा मनोहर पर्वत शीर्ष मुकुट बादल हैं लोक संस्कृति शोभा न्यारी , नदिया की कलकल धारा है  देवभूमि उत्तराखंड हमारा गुलमर्ग ,हिमाचल सा सुंदर है रेल प्रोजेक्ट को स्वप्न ही कहकर हंसते थे जो लोग कभी आज सभी एक स्वर  में बोलें उत्तराखंड  हमारा है ।। ऋषियों की यह पावन धरती पुनः आज तैयारी है पर्यटन को मिलेगा अवसर रोजगार का सृजन हो थम जाएगा सभी पलायन , और सीमाएं सुरक्षित हों ख्वाब हकीकत में तब्दील हो , मंजूरी सरकारी है ऊंची ऊंची नभ को छूती पर्वत की श्रृंखलाओं में रेल चलेगी जब पर्वत पर कल की इक बुनियाद बने क्षेत्र सुरक्षित , सीमा  सुरक्षित रोजगार भरपूर मिले सपन सुनहरे भविष्य की गढ़कर तुमने जो उपकार किया याद रखेगा जनमानस इतिहास अमर हो जाएगा ।। ।

सुविचार 2

शांत स्वभाव को अपनी कमजोरी न समझें यह स्वभाव आपके विचारों का प्रतिबिंब है ।। गर्व और मद में चूर होकर सूखे वृक्ष की तरह हम रहेंगे  तो फलों से लदी डाल से हमने झुकना सीखा ही नहीं ।। अहम की जड़ को यदि आप काट ना सके  तो संस्कारों की उपज को हम समझ ना सके ।। पगडंडियां मार्ग दिखाती है , आध्यात्म पथ के  राही  आत्मकल्याण की पगडंडी पर चलें तो पारलौकिक सफर आसान हो जाएगा ।। जितना सूक्ष्म ब्रम्हांड है उतना ही सूक्ष्म मानव मन की गति मन की एकाग्रता का रहस्य संत महापुरुषों से जाना जा सकता है ।। शारीरिक रोग उपचार से ठीक हो सकता है किंतु आत्मिक रोग आध्यात्मिक चिकित्सक से ही सम्भव है ।। दुनिया मे भ्रमण करने के लिए हमें वीजा बनाना पड़ता है परलोक के लिए अच्छाई का पहचान पत्र हमे खुद बनना होगा।। अपने मन में बुराई के वायरस को मत आने दो  अच्छाईयों के एंटीवायरस से डिलीट करते रहो  जीवन रूपी कंप्यूटर सदैव सक्रिय रहेगा।।

सुविचार 1

विनम्रता मनुष्य का आभूषण है , जो व्यक्ति मन एवं आचरण दोनों से उदार होगा ,वही इन्सान परमेश्वर का प्यारा होगा ।। परमेश्वर प्रेम है जीवों से प्रेम करो ,उसके संसार को प्रेम बांटो किसी को ठेस पहुंचाकर हम सुख की कल्पना नहीं कर सकते ।। गुणी व्यक्ति कभी किसी की बुराई नहीं देखता यही इन्सान का सबसे बड़ा गुण होता है ।। अमरत्व का ज्ञान हमें शाश्वत ज्ञान से जोड़ता है शरीर से मोह समाप्त होना ही मोक्ष का धाम है ।। विद्युत प्रवाह के लिए ठंडी गर्म तारों का सम्पर्क होता है ठीक उसी प्रकार ईश्वरीय पॉवर हाउस से जोड़ने के लिए अच्छाई बुराई दोनों का सामना करना होगा ।। हमारा दिल ही मंदिर,मस्जिद,गिरजा है जहां परमात्मा अपनी रजा में रहता है उसकी रूहानी ताकत हम बंदों को नेकी पर चलाती है ।। बंजर धरती उपजाऊ बन सकती है , दरिद्र धनवान बन सकता है मरुस्थल में पानी बह सकता है ,परन्तु अहंकारी हृदय में प्रेम उत्पन्न नहीं किया जा सकता ।। धरती पर पाप बढ़ने पर प्रकृति विध्वंसक हो जाती है मानव दोहन करता है और कुदरत न्याय करती है तो रूह कांप जाती है।। क्रोध को खुद पर हावी मत करो , प्रेम से व्यवहार करो अक्सर...