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भजन- तेरी रहमतें हम पर बरसने लगी

तेरी रहमतें हम पर बरसने लगी , भूलकर इस जमाने को रमने लगे
एक नाता है तुझसे जुड़ा भाव का , सारे झूठे प्रपंचों से हटने लगे

तेरी कृपा  है सागर में मोती के जस जिसकों मिलता है सौभाग्य होता उदय

तेरे गुणगान में ऐसी शक्ति छिपी दुनिया से अब विरक्ति का मार्ग मिला
फूले हम  हैं समाते क्या किस्मत मिला नहीं दुनिया से कोई  रहा वास्ता
जो भी वर मांगना है तुम्ही से कहें  हसरतें लाख करने से क्या फायदा
दीन दुखियों की करके सेवा धर्म तेरे राहों पर चलने का मार्ग मिले
कर चलें नेक कर्मों को दुनिया से हम अंत हो इस जन्म की विदाई सुखद।।

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