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जनवरी, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बिखकर संवरना ही जिंदगी है

 तकलीफों से लड़ना ही जिंदगी है । पतझड़ के बाद भी जिंदगी है ।। अश्क जब पत्थर बनकर थम  जाए। जज्बातों पर काबू पाना ही जिंदगी है ।। ना हो मायूस  कि उजड़ा जहां है तेरा। आशा का गुल खिलना ही जिंदगी है ।। राख के ढेर से माथे का तिलक सजा। ख़ाक से चिंगारी होना ही जिंदगी है ।। दौर  बुरा ही सही ना हताश होना । कर्म और भाग्य का खेल ही जिंदगी है।। कुछ रिश्ते बचाने  के खातिर ही सही। अपनों से हार जाना ही जिंदगी है ।। यूं हालातों से अंत  तक ना हार मान । तकलीफों से लड़ना ही जिंदगी है ।। उम्मीदो का चराग ना बुझ पाए "गुंजन"। बिखरकर खुद में संवरना ही जिंदगी है ।। @shabadgunjan

दुल्हन अब बारात ले गई (हास्य रचना)

 मानसरोवर साहित्य अकादमी हास्य रस पेशकश............. दुल्हन अब बारात ले गई , दूल्हा अपने साथ ले गई। दान दहेज कार मर्सिडीज ,सिगरेट वोडका साथ ले गई ।। महंगे महंगे रेस्टोरेंट में , पिज्जा बर्गर ऑर्डर करके  । भंग धतूरे चरसी गांजा , चढ़ा के टल्ली आज हो गई ।। खाओ ससुर जी अंडे मछली पियो शराब मां सासू जी । जैसे तैसे पटा के घर को मॉडर्न हसबैंड मॉल ले गई ।। मर्सिडीज की महंगी कार सरपट रोड पर चले दानंदन। हाई स्पीड से सिग्नल तोड़े मूड बनाए शॉपिंग हो गई ।। दिल धक धक करे सिग्नल तोड़े, महंगी गाड़ी हत्थे लगी। पति का हाए माथा टनका, ट्रैफिक पुलिस पास आ गई।। कटा चालान हुआ हंगामा कहा पति तुम रील  बना लो  हाई हील में बहु उतरकर ट्रैफिक पुलिस के ऊपर गिर गई।। चकमे पर दे चकमा चश्मा  हाए ये तेरा काला चश्मा । माना पति करतब पत्नी की चोर पुलिस साठ गांठ हो गई।। निडर दबंग बहु आधुनिक हुस्न अदाएं कमाल दिखाए। चर्चे किस्से वाह वाह ये नई बहू क्या कमाल कर गई ।।

हास्य गीत छोरी और छपरी

  जब मेकप में  लडके  लड़कियों को देखते हैं तो आह और वाह दोनो से रूबरू होते हैं  इसी पर आधारित एक हास्य काव्य है  छोरी और छपरी ......... क्या खूब लगती हो बड़ी विचित्र दिखती हो रंग गोरा है लेकिन क्यों नाखुश सी दिखती हो ये मेकप शेकप से बढ़िया (सीधी साधी ही रहना)2 हाए....!चक्कर खा  गिर गया वो छोरा .....माशाल्लाह!! अब चूंकि लड़की को गुस्सा आ जाता है और कहती है कि तुम्हारी तो अकल ठिकाने पर होनी थी   .......... कि........ चेहरा क्या देखते हो  (घुटने में मेमोरी हमारी है) (२) हमसे अकलमंद हो  तो हम पर क्यों लट्टू  होते हो हमें कायाकल्प  सौंदर्यनीखार(पार्लर में देखा तो )२हाए..  चक्कर खा  गिर गया वो छोरा .....माशाल्लाह!! समस्या इतनी गंभीर नहीं है जितना की हम अनुमान लगाते हैं .........थोड़ा अकल से काम ले तो बहुत से हादसों का शिकार होने से बच सकते हैं ..... थोपे लिपिस्टिक जुल्फें कैरेटिन नकली नखून रंगे बलखाती मदमाती छोरी के पीछे कितने छपरी पड़े ब्यूटी प्रोडक्ट्स  हाई हील (अदाओं में उलझा गुंजन)2 हाए....! चक्कर खा  गिर गया ...

ठौर तेरा परमपद हो मुक्तक काव्य

  भक्ति में भाव विकृत हो तो ठोकर से जगाना तुम तेरी सेवा  से मन भटके  तो दर्शन से उठाना तुम मेरे अंग संग सदा रहना मेरे  अंतस में हे ईश्वर खुशी के अंगिनत पल मे  माया से बचाना तुम।। ये पल मेरा हो अंतिम तो सफर में तुम ही संग रहना   मुझे खुद से गिला ना हो  सहायक तुम सदा रहना कठिन पल हो या दुःख घेरे या रौनकें हो जमाने की कमल पुष्पों सा  मन निर्लिप्त निर्मोही मुझे रखना।। छणिक सुख में जो भूलूं मैं तेरा दीदार मुश्किल हो विषय सुख में ये फूले मन तेरी रहमत आसां ना हो अगर दुनिया के सुख में मन सदा डूबा रहे फिर तो मुझे देना जन्म  दूजा  ठौर तेरा परम पद हो । ।

मैं मच्छर संग हास्य करूंगा

  आज का दिन है सबसे भारी , काटेगा मच्छर कर लो तैयारी खिड़की डोर खुले हैं सारे , वाह वाह क्या हवा सुहानी कोना कोना धूल उड़ाए आंधी बवंडर लेकर आए आज तो अपनी शामत आई मच्छर धीरे धीरे टपके बर्तन धोए खाना पकाए मईया बोली हाय री दईया मच्छर अब ये कहां से आए डोर खुला हमलावर आए गुस्से में हो आग बबूला , पिटे दनादन दीदी भैया मैं छोटा बचकर जा दुबका, मईया के आंचल जा लिपटा मुझे दुलारे एक हाथ से दूजे हाथ में डंडा उठाए छिपकर आंचल से मैं देखूं दीदी भैया की खूब पिटाई सोचा क्यों ये रोब जमाते मैं छोटा हूं तो मुझे डराते मैने भी तरकीब निकाला , रोज खुले खिड़की दरवाजा मईया इनको पीट पीट कर मच्छर जैसा सबक सिखाए आओ मच्छर राजा आओ झुंड बनाकर इन्हे सताओ  मैं खोलूंगा रोज दरवाजा मच्छर मित्र सभी आ जाओ बारिश में तुम ढेरो आना अपनी टोली साथ ले आना मैं आने का निमंत्रण दूंगा संध्या ढले चुपके से कहूंगा मईया मईया देखो भैया आज गए हैं सैर सपाटा डेंगू मलेरिया से ना  डरूंगा पूरे कपड़े पहना करूंगा छोटा हूं सब लाड करेंगे मैं मच्छर संग हास्य करूंगा।

आशिकी बुजुर्गों की

  अगर है दर्द तो इस दर्द की कोई दवा होगी । मोहब्बत है दिलों मे तो नहीं कोई गिला होगी ।। बिछडते हैं दो दिल मिलकर कटघरे में सवालों के। फैसला गर इश्क है तो आशिकी ही रज़ा होगी।। अपनी ही किस्मतों को संवारने  की फिरात में । खुद ही खुद से रूठने की आखिरी सजा होगी।। ना तलाशना जहां में किसी  ठौर ठिकाने को  । दर्द के आशियां में  मुकाम तुझे भी अता होगी ।। एक मुद्दत से बेखबर ना खोज खबर है कोई  ।  वो माशूका कब तलक मजनू से खफा होगी ।।  इश्क की जद में है गुंजन युवा नाकाम कतारों मे फिर भी आशिकी इन बुजुर्गों की  जवां होगी ।। ©®

भारत मॉरिशस मैत्री संबंध (स्मृतियां)

           जाओ  अपने देश मगर मेरे भारत को ना भूल जाना इसकी मिट्टी की खुशबू सहयोग प्यार दिल में रखना मॉरिशस इतिहास जुड़ा भारत से नहीं  तटस्थ रहा प्रभु राम मारीच को फेंके वो देश मॉरिशस नाम पड़ा ।। धर्म संस्कृति रीति रिवाजें  दोनो ही समानांतर है ऐसा कौन सा देश अछूता लघु भारत का नजारा ना है माना कि अंग्रेजी हुकूमत से हम त्राहिमाम थे कल किंतु विकसित तकनीकी में केंद्र देशों से ना कमतर है ।। भारत मेरा अंग्रेजों का उपनिवेशी साम्राज्य बना इसकी कुदरती उपजती मिट्टी सोने का खान बना देख समृद्धि दुश्मन देशों को खलबली मची भारी सोने की चिड़िया को जकड़े जंजीरों में बांध दिया आज़ हमारा देश भी विकसित वीटो पावर में होता फिर भी वैज्ञानिक तकनीकी में बलशाली है देश मेरा ।।

खुशियों में अपनों का साथ

 कभी खुशियां हमारी थी कभी एक वक्त अपना था कभी लाखों बहाने थे कभी गम का ना कतरा था जुदा होकर के अपनों से जन्मदिन क्या मनाते हम पुनः इस बार खुशियों में लम्हा गुजरा सताया था।। सेवी भावो से कर्तव्यों को मिलकर के निभाते थे किसी संकट में हम सब साथ एक दूजे के सम्बल थे सामाजिक क्रूर व्यवस्था से किनारे पर खड़े हैं अब वक्त करवट ना बदले तो हम भी अपनों में शामिल थे ।।

शेर (दो लफ्ज़)

 *अपने ही जख्मों को बार बार कुरेदती हूं मैं दिल में उठते एहसासों को लफ्ज़ देती हूं मैं लोग सिर्फ ठहांके लगाकर जुड़ते हैं मुझसे आखिर हर बार वही गुस्ताखी करती हूं मैं ।। * तुम जा रहे हो जाओ फिर लौट कर मत आना अपनी किताब लिए जाओ यह एहसान कर जाना।। *सिर्फ हम ही मगरुर नहीं मुजरिम तुम भी कम नहीं अब शौक से लौट जाओ हमें खातावर ना ठहराना ।।   *ये चांद ये  तारे और सूरज  क्या जहां को रौशन  करते हैं  । सुना है ये ईशकजादों को ये बेहद गमजदा करते हैं ।।  

अकड़ को हार जाने दो मुक्तक

 कसक भूल जाना स्वयं को तुम किसी से भी कभी कमतर नहीं मानो  हकीकत की कहानी को खयालातें नहीं जानो अगर ये जिंदगी मझधार में लाकर डुबोए तो बुरे पल भूल जाओ पर कसक दिल में नहीं  रखो ।। अकड़ को हार जाने दो हुनर कुछ खास रखते हो तो मद मन में ना आने दो नहीं फिरना गुमानी में  छलावा भूल जाने दो जो पाया है यहीं खोना चाहे राजा भिखारी हो जुड़ो सद्भाव मैत्रीय से अकड़ को हार जाने दो  ।।

वनवासी जीवन का कष्ट और सेवक की निष्ठा

 सेवक का भाव मुझे हर सुख दिया मालिक नहीं महरूम रक्खा है तेरी सेवा मिले कण भर ना ख्वाहिश ढेर रक्खा है मिला  जितना मुझे दर से बहुत उपकार है  तेरा   नमन तुझको करूँ मालिक ख्वाहिशों में क्या रक्खा है।। वनवासी सेवक लक्ष्मण सेवक शव में कोई ना अंतर तपवन देह करे हैं ये वक्त कठिन हो पीर घने पर पल पल धीर धरे हैं ये कष्टों के पर्वत बन लोग डिगायें जब भी लांछन से एक आस  प्रभु नेह लगाये जग से नेह तजे हैं ये ।। कलियुग में राम नाम अयोध्या से विदा लेकर चले श्री राम जंगल में भटकते कुटी में ऋषियों के राक्षसी दैत्यों से लड़ते सिया का धर्म पतिव्रत था लखन का प्रेम अनुपम था चरित पावन राम गाकर हो पावन लोग कलियुग में।। सीता की पवित्रता पर लांछन नियमों ने बांधा है हमको रीति रिवाजें जकड़े हैं मोह के धागे बंधु बांधव मित्र सम्बन्धी पकडे हैं सन्यासिन बन जीवन जीना सरल नहीं दुश्वार हुआ कदम कदम पर लांछन मिलना मन वैरागी समझे है।। वनवासी जीवन का कष्ट कहने को कुछ नियम उचित है जीवन कठिन तपस्या हो पशु सा खाना पीना सोना  जीने का नहीं मकसद हो महामानव बनने के सफ़र में मानव कुछ तो त्याग करे तन को शव सा...

एक घड़ी इंतजार की (कवि सम्मेलन)

  वो आधी रात हम श्रोता वो आधी रात तुम वक्ता उधड़बुन में पड़े थे  कि डिनर की पूड़ी थी  खस्ता जमे महफिल में सायंकाल अर्धरात्रि प्रहर गुजरा जो बारी अपनी आई तो नापने लगे थे सब रस्ता ।।   कश्मकश में पड़े थे हम क्या महफिल में सुनायेंगे नशा ए नींद में जनता  मनोबल  हम क्या पाएंगे  किसी को चाय की बढ़ती तलब देखी तो ये सोचा पकाऊ वक्त था कि फिर पकाऊ हम वहां निकले।। शब्दो के तीर छंदों के कमानों से यूं गुजरे थे किसी के शब्द भेदी बाण हृदय को छू के गुजरे थे राष्ट्रव्यापी सामाजिक राग विविध पुष्पों के गुच्छे से महक फैली दिशाओं में साहित्य सृजन को निकले थे। 🇮🇳🇮🇳🎉🎉💐💐📖📒📒😊🙏🙏

जख्मों के हवाले कर दूं

 सोचती हूं जिंदगी को जख्मों के हवाले कर दूं। कुछ इस तरह  खुद को  मैं मशगूल कर  दूं ।। उड़ना चाहूं तो इन पैरों में छाले हो अरमानों के तेरे इश्क में उलझकर खुद को ही जंजीर कर दूं।। ना खोल सके इश्क ए बेड़ियां दिलों का कोई । तेरी खूबियों के किस्से हर दिल अजीज कर दूं ।। मुझे मेरी फिक्र ना हो  ना तू मुझसे जुदा हो मैं तुझमें ही फना हो खुद को मशहूर कर दूं ।।

दर्द भरी दुनिया में एक अकेले नहीं हम

 दिल वारे इस कदर एक तुम्ही याद रह गए। इज़हार ए  इश्क करके अब हार गए हम ।।  खुद को भूल गए या खफा हुए खुद से।   नहीं मालूम क्या इतने खतावार हुए हम ।। तकलीफों का सिलसिला यूं चल पड़ा है इश्क ए कश्ती में डूबे ना पार हुए   हम ।। खयाल रुलाता है कैसे जिएंगे तुम्हारे बिना। दर्द भरी इस दुनिया में एक अकेले नहीं हम ।। क्या कहें कि तुम्हे खबर ही नहीं हमारी । बरबस किस्मतों को ही कोसते रहे हम ।। वफा वादे कसमें सब बातें फिजुली है गुंजन। जिंदगी के इस खेल में खुद से हार गए हम  ।।

जोड़ियां बने आसमानों पर

 इश्क में रोष हो इश्क में होश हो   जिंदगानी में शामिल कोई खास हो एक सफर जिंदगी का हो एकाकी क्यों अंतस एहसास हो दिल ये गुलबाग़ हो ।। अपना होकर भी वो ना हमारा हुआ वादे करके ना वो ख्वाब झूठा किया इश्क के राहों में पल दो पल खास हो विक्षोभ वनवास से प्यार कुछ कम ना हो ।। हसरतो का समंदर उफानों पर है धड़कनों में हरारत उफानोंं पर है कैसे कह दूं मेरा दिल हो पत्थर शिला जोड़ियां  तो बनी आसमानों पर है ।।

यादों का घरौंदा..... गज़ल

  मुझमें बसा यादों का एक घरौंदा है । हंसी लबों पर नकली एक मुखौटा है।। उसे फिकर है मेरी मगर वो मेरा नहीं । दिल मेरा हर बार बिखरकर जुड़ता है।।  दूर बहुत है सुकून भरा वो चांद मेरा । उसके दीदार को दिल मेरा  तरसता है।। इश्क ए बहारों में आशिक ठौर कहां पाए।  दिल बंजारों सा मारा मारा फिरता है । । लैला मजनू के किस्से  खूब सुहाए जिन्हे। वो आशिक आवारा मनचला कहाता है ।। अपनी मौज में सुखी रहो गर सिंगल हो। दिलों में हलचल करके इश्क रुलाता  है ।। जज्बातों से खेल ये इश्क नहीं गुंजन । अश्कों से अनुबंध अगर ना  आता है।।

ओज मुक्तक कर्मपथ

 कर्मपथ की ओर  उठो इस गहन मुद्रा से , समाधि प्राण साधे हो बनो अर्जुन धनुर्धारी  , ऊर्जा के स्रोत भारी हो यूं ही एकांत प्रिय रहना भला कैसे कहें बेहतर लौट जाओ ध्रुव घर को पिता का हृदय बैठा हो ।।    बाधा से परे  घिरने  लगो मझधार में तो  प्राण साध  लो बहिर्मुखी इंद्रिय ग्राहय  विषयों  को तुल ना दो बाधा जीवन की  संपदा ईश्वर की भेंट है इच्छाशक्ति  के बल से ही निर्वाण को चलो।।    

हास्य , ख़्याल

  शराबी आशिक जख्मी दिल का हाल तुम्हारा ठीक नहीं भूलने का ये बहाना अब तो ठीक नहीं हंसते रोते शाम ओ सहर वो याद आए याद में उसके घूंट घूंट पैग ठीक नहीं  फूड ब्लॉगर  ये फूड विलॉगर भी क्या कमाल दिखाते हैं हरकत इनकी जैसे कुंभकरण के भूख सा है चाहे लड़का लड़की हर भेद मिटाकर के खाने पर टूट रहे फैन फॉलोइंग बढ़ाते हैं स्पैमकाल करने वाले एक मिसकॉल से अलर्ट करते हो तुम स्पैम एसएमएस से क्यों डिस्टर्ब करते हो तुम अरे ब रखुरदार खुद को मजनू बताते हो तो सुनो क्या अपनी मां बहन को  ऐसे ही परेशान करते हो तुम।। एसिड अटेकर्स आशिक ये एसिड ये तेज़ाब  क्या इश्क में यही चोंचले होते हैं शिद्दत से एकतरफा चाहत के दर्दनाक अंजाम होते हैं तुम कहते हो बेहद बे इंतहान मोहबत करते हो क्या फायदा ऐसे शैतानी फिदरत वाले तो हकदार ए जहन्नुम होते हैं।। चुनावी माहौल के बाद की दशा  लिबास बदल लो एक नया लिबास पहन लो  तुम अपना किरदार बदलकर नया किरदार गढ़ लो तुम मुखौटे तो हर रोज बदलते हो झूठ फरेब मक्कारी का अब चुनाव खत्म हो लिए कहो जनता फुट लो तुम ।। दिलफेंक आशिक हमें दिल का ऑनर बताते हो मजाक बनाते हो त...

नया साल नई उम्मीद ( गज़ल)

  पतझड़ के बाद भी जिंदगी है । अंत से प्रारब्ध ही जिंदगी है ।। अश्क जब पत्थर बनकर थम  जाए। जज्बातों पर काबू पाना ही जिंदगी है ।। ना हो मायूस  कि उजड़ा जहां है तेरा। उम्मीदों का गुल खिलना ही जिंदगी है ।।   राख के ढेर से माथे का तिलक सजा। ख़ाक से चिंगारी होना ही जिंदगी है ।। दौर  बुरा ही सही ना हताश होना । भाग्य कर्म का खेल ही जिंदगी है।।   कुछ रिश्ते बचाने  के खातिर ही सही। अपनों से हार जाना ही जिंदगी है ।। यूं हालातों से आखिर  तक ना हार मान तकलीफों से लड़ना ही जिंदगी है ।। साल आएगा जाएगा यूं ही हर साल । नए उम्मीदों का खिलना ही जिंदगी है।। लता सी नाजुक चट्टान सा दमखम लिए ’गुंजन’ बिखरकर खुद में संवरना ही जिंदगी है ।।

इश्क और तन्हाइयों का वास्ता(गजल)

इश्क और तन्हाइयो का वास्ता पुराना है यारों दिलों से खेलने वालों को दरकिनार रखा जाए ।। जो  कद्र ना कर सके सजदे में आए फूलों का तो उन्हे उसकी खुशबूओं से महरूम रखा जाए ।। ना पायमाल हो इश्क ए जुनून में  रख हौसला कि  मंजर उदासी का वो दौर भुलाया जाए ।। अंदाज अपना अलग हो महफिल में मुस्कुराने का तो गमों से कह दो वो होठों की दहलीज से चले जाए।। जो लड़ सके हालातों से मुस्कुराते हुए  गुंजन वह शख्स खुद में मुकम्मल किरदार लिखा जाए।।

राम प्रभु की प्राणप्रतिष्ठा

 अंतरराष्ट्रीय साहित्य परिषद क्रमांक : 2273 शीर्षक  : राम प्रभु की प्राणप्रतिष्ठा श्री राम जन्म भूमि पर  मंदिर पुनः बनाया  है कलियुग में श्री राम नाम का बज रहा  डंका है दर्शन करने को  आतुर श्रद्धालुजनो की भीड़ मिली जीत ऐतिहासिक इक पल लगता सपना है।। बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मृगशिरा नक्षत्र के शुभमुहूर्त में हो शंख नाद देश में लहर उठी है घर घर गूंज रहे सिया  राम राम चैतन्य  विराजें सफल हो  प्राण प्रतिष्ठा काज लंबी प्रतीक्षा खत्म हुई है नहीं रहा अपवाद !! बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मेरा  भारत अमर रहे बने विश्वगुरु  पहचान धर्म विज्ञान के समायोजन से होगा देश महान राम राज्य की परिकल्पना किया था गांधी ने राममय हुआ समूचा भारत जान गया ये जहान ।। बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम विद्रोहीयों का काम है हर एक काम रोड़ा डालें अपने देश में रहें परंतु  बिरयानी पड़ोसी  खाएं चिंता फिकर नहीं चाहें जितना  जोर लगाए वो तुम जपना  श्री राम अमंगल बजरंगी टालें ।। बोल...

हास्य गीत (जो ट्रेंड में है आज वो सवाल)

जो ट्रेंड में है आज वो सवाल लाई हूं इंस्टा पर रील से भरे जवाब लाई हूं बदनाम है पति  तो बीवी भी कम नहीं शक्की मिजाज़ इनका सीआइडी से कम नहीं जो ट्रेंड में है आज ........ लत शराबियों की क्या कहें बेलन से वे कुटें दोस्तों से ले उधार मयखाने को फिर चले चैनी खैनी सिगरेट हुक्के में वृद्ध अव्वल युवा तो हैं महान ये बच्चे भी कम नहीं जो ट्रेंड में है आज ..... बस दो मिनट मैगी के जैसी जिंदगी नहीं दिलफेंक आशिकों के मुखौटे कुछ कम नहीं वादें हो हमसे प्यार और शादी किसी से हो चांद तारे कदमों में बिखेरे जुमलों की झड़ी जो ट्रेंड में है..... जुगनी करे कमाल तो जुगने भी कम नहीं बदनाम हो पूजा तो रसिया भी कम नहीं लगता है दूध के धुले हुए हैं सब यहां गर सास हो दो नंबरी बहु भी कम नहीं ।। जो ट्रेंड में है.... सच्चे प्यार में पड़े हुए  चालाक चालबाज  दो चार की क्या बात है घोटाले हैं सभी लगता है घोटालों की पूरी फौज है यहां तुम पोल खोलो दोस्त जिगरी हम भी कम नहीं जो ट्रेंड में है................ क्या खिताब लाऊं आशिकी के चोंचले यहां जिसे जान कहते हो  वो किसी और की है जान  उस जान की तो जान अब हलक म...

मन मस्त मगन मन

  सुख के तिनके तिनके लम्हें दुःख की सांझ में ढलते हों। राहें कठिन हो हो जाए तुम अपना मनोबल बढ़ने दो।। खुशियों की उड़ाने रद्द होने से मन का विचलन बढ़ जाए । इच्छा मिटे तो मिट जाए खुद पर से यकीं ना मिटने दो ।। चींटी के लघु क्षमता से हाथी का वजन  ना तोलो तुम। घायल मन हो हो जाए बस  खुद पर भरोसा रहने दो ।। थिरक उठे बारिश में मयूर प्रकृति राग सुहानी हो  । मूड खराब हो हो जाए मुस्कान अधर पर रहने दो ।। जीवन के आपा धापी में जब रिश्ते बोझ से लगते हों  ।  गांठ लगे तो लग जाए कुछ निर्णय वक्त पर रहने दो ।। धुंध घिरे पथ कोहरे से विजिबिलिटी शून्य हो जाए तो। कदम डिगे तो डिग जाये प्रगाढ़ आत्मबल रहने  दो।। वृक्षों से लिपटी लता खिलीं ये हंसी अदाऐं मस्तियां । ख्वाब मरे तो मर जाए कुछ नए ख्वाब को बुनने दो ।। एक मुद्दत से अरमानों के लौ को यूं बहकने दो ’ गुंजन’ हया मिटे तो मिट जाए मन मस्त मगन मन रहने दो।।

कवियों की दुखती रग

 कवियों की दुखती रग है ये इश्क मृग मरीचिका सी होड़ है ये इश्क सुबह  शाम  दिन रात  ही  रोते मानो कुदरत का अजूबा भेंट है ये इश्क ।।

कवियों की दुखती रागिनी

  सुबह शाम रोते हैं दिन रात कहते ये कवियों की महफिल है कवियों को सुनते मेरा बिंब तुममें तेरा गीत मुझमें ये दुनिया की कश्ती में साहिल को कहते क्यू दर्पण है सुना या चेहरा है मुर्झा ये होठों पे सिसकन ये  आंखो का दरिया बयां करते हैं ये सभी चिन्ह मेरे क्यों मुझमें है गूंजे कोलाहल सा गुंजन मै खुद में सिमटकर जमाने से छिपकर स्वयं से स्वयं को बहाओं से थमकर कि दो पल सिसकर हां आंसू बहाकर ले होठों पर मुस्कान गमों को छिपाकर  हृदय पीर  ख्वाबों ख्यालों  के रास्ते दो पन्नो के धरती पर आंसू से कहते उठा दिल के अरमां सितम ढा दो सारे लिखो होके तन्मय हृदय गीत प्यारे ना कहना किसी से ना खुद को भुला दो  , रवानी बदलती बहारों से कह दो मेरा वक्त जाया करे ना जमाना  उठूंगी जो गिरकर स्वयं से संभलना वो कर्ता तो गढ़ता स्वयं से जहां को तो कवि से साहित्य को आयाम मिलता प्रखर हो के चमको जहां को बता दो नहीं गम में डूबे हो वादा ये खुद से सुबह शाम रोते....... यही पक्ष बेहतर है संसार सृजन कला संस्कृति ज्ञान विज्ञान उत्तम ये समुदाय अपना ( कक्स्टिसम नहीं कवि समुदाय है) बुलंदी को छूता  रचे ...

पानी छूना स्नान माना जायेगा (हास्य गज़ल)

 ठंड में ये बयान माना जायेगा । पानी छूना भी स्नान माना जायेगा ।। मकर संक्रांति का इंतजार है जिनको ।    फिल्हाल ठंड का लुत्फ उठाया जाएगा।। होली तक सर्दी गुजर जाए क्या पता। मौसम का मिजाज कब  बदल जाएगा।। इग्लू इग्लू बर्फ के गोले से दिखते लोग। कोहरे की धुंध में हाथ जम जायेगा।। गीजर  हीटर की सुविधा कहां सबको। अंगीठी जलाकर घरों में बैठा जायेगा।। ठंड में ये बयान माना जायेगा । पानी छूना भी स्नान माना जायेगा ।।

इश्क के दहलीज पर (गजल)

  तेरे इश्क के दहलीज पर सिर रखा है तू सजदा समझ या मेरा गुरुर रखा है मुझमें मैं तो नहीं बस तू ही तू समाया है इस दिल ए आंगन में तेरा ही बसर रखा है  एक भरम है तुझसे बिछड़ ना जाऊं कहीं । इस बाबत तेरा दामन हमने पकड़ रखा है।।    तू मशगूल है अपनी दुनिया में इस कदर कि तेरे इंतजार में दिल पर पत्थर रखा है लौट आएगा मेरे कहने पर कैसे मान लूं तेरी जिंदगी में मेरा क्या मकाम रखा है तू खुश रह जहां भी रहे बस यही दुआ है ऐ दोस्त जा तुझको मैने आज़ाद रखा है ।।

मुक्तक , व्यंग्य

 वर्चुअल काव्य पाठ की समय सारणी जब अर्धरात्रि में सेट हो जाए तो सन्नाटे में  तुम जरा तरन्नुम  का ख्याल रखना करुण रस को अपने गायकी में आबाद रखना ओज  के हुंकार  से  पड़ोसी ना जग जाएं कहीं श्रृंगार की माधुर्यता में हास्य का ख्याल रखना ।।

कवि समुदाय का नामकरण

  ये  कवि हैं जनाब  कोइ प्रयागी कोई गढ़वाली बताता है नाम के साथ नए प्रयोग कर कोई शख्स यमदूत बताता है ।। चल पड़ते हैं कारवां इनके पीछे मगर  क्रांति रुकती  नहीं । कोई मेघदूत सा गरजता कोई श्रृंगार का जानकार बताता है।। सर  नेम बदलने की हालत महज औरतों  की नहीं । वो शौहर अपनी शिनाख्त शायर बदनाम बताता है।। कितने नाम हैं  नाम के पीछे भी एक नाम  रहस्यमई चुनाव । मेरे मन से निकले अल्फाजों की खूबी हर शख्स बताता है।। काव्य रस को अलंकारों की चाशनी में डुबोए कोई रसिक । कभी बरसता है कोई बादल बन तो खुद को कोई लुल बताता है ।। दर्द अल्मोड़ा भी कतारों में है खड़े सिमटे गीत गजलों में । शिला सा टकराता कोई शख्स गम का सौदागर बताता है।। फिर चलता है एक नया सीरीज इंटरव्यू का ’ गुंजन ’ । पेननेम का लोचा साक्षात्कारकर्ता क्लियर बताता है ।।

राम लला की प्राण प्रतिष्ठा (मुक्तक गीत)

 श्री राम जन्म भूमि पर  मंदिर भव्य अनोखा है कलियुग में श्री राम नाम का बज गया डंका है दर्शन करने को  आतुर श्रद्धालुजनो की भीड़ मिली जीत ऐतिहासिक इक पल लगता सपना है।। बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मृगशिरा नक्षत्र के शुभमुहूर्त में हो शंख नाद देश में लहर उठी है घर घर गूंज रहे सिया  राम राम चैतन्य  विराजें सफल हो प्राण प्रतिष्ठा काज लंबी प्रतीक्षा खत्म हुई है नहीं रहा अपवाद !! बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम_२ मेरा  भारत अमर रहे बने विश्वगुरु  पहचान धर्म विज्ञान के समायोजन से होगा देश महान राम राज्य की परिकल्पना किया था गांधी ने राममय हुआ समूचा भारत जान गया ये जहान ।। बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम अरे विद्रोही का काम है हर एक काम रोड़ा डालें अपने देश में रहें परंतु  बिरयानी पड़ोसी  खाएं चिंता फिकर ना चाहें जितना  जोर लगाए वो तुम जपना  श्री राम अमंगल बजरंगी टालें ।। बोलो जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम