अगर है दर्द तो इस दर्द की कोई दवा होगी ।
मोहब्बत है दिलों मे तो नहीं कोई गिला होगी ।।
बिछडते हैं दो दिल मिलकर कटघरे में सवालों के।
फैसला गर इश्क है तो आशिकी ही रज़ा होगी।।
अपनी ही किस्मतों को संवारने की फिरात में ।
खुद ही खुद से रूठने की आखिरी सजा होगी।।
ना तलाशना जहां में किसी ठौर ठिकाने को ।
दर्द के आशियां में मुकाम तुझे भी अता होगी ।।
एक मुद्दत से बेखबर ना खोज खबर है कोई ।
वो माशूका कब तलक मजनू से खफा होगी ।।
इश्क की जद में है गुंजन युवा नाकाम कतारों मे
फिर भी आशिकी इन बुजुर्गों की जवां होगी ।।
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खुशियों से भरा हो लाखों पल ,कहीं नैन नमी से युक्त रहे झरझर बरखा जो बून्द पड़े , फिर भी अंगना हो अनल तले नभचर ख़ग दाना- दाना को ,अन्न नीर बिना जैसे तरसें विचरे नभः में पंखे लहरा , उन्मुक्त गगन से दूर चले जो क्षितीज दिखे पंखों के परे ,भानू किरणों से तपता रहा अंकित जो करूँ दुःख का बादल ,चहुँ ओर घिरे पर भीग रहे ना उड़ पाया न ठहर सका, हर तरफ ही नीड़ तलाश रहा बेबसी के काले बादलों ने ,सपनों की उड़ानें रद्द कर दी चंचल ऋतुओं का क्या कहने,बेवक्त मिजाज बदल बैठे बेमानी लगे सावन भी उसे ,वो मयूर नहीं जो थिरक सके पंखें भीगी नम नैन हुए, किस ओर दिशा में नीड़ बसे। गायत्री शर्मा
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