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सितंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तितली बन उड़ जाऊं मैं

तितली बन उड़ जाऊं मैं , डाल डाल पर ईतराऊं । रंग बिरंगे पंख हैं मेरे  उपवन को मैं  महकाऊं ।। मैं उड़ बैठूं घर आंगन और फुलवारी की क्यारी में। मुझे पसंद है पुष्प महकते खिलते हुए बागानों में ।। मेरा घर एक बगिया पूरी , लहराती हरियाली में। चिड़िया, कोयल ,मोर ,पपिहा भरी बिरादरी टोली में।। मैं भाती हूं बच्चो को बेशुमार चहकते होते मगन। मुझे पकड़ने दौड़े आते मैं उड़  जाऊं नील गगन।। लोग अनोखे लगते मुझको , मेरा चमन गुलजार है। मुझे भगाते यहां वहां से बाग बगीचे खलिहान हैं।। मेरी प्रजाति मेट रहे हो  बाग बगीचे काट रहे हो । गौरैया को विलुप्त किए मेरी भी प्रजाति मेट रहे हो।। इस धरती पर जीना मेरा  बना दिया उपहास । मुझे देखने को तरसोगे  बन जाऊंगी इतिहास ।।

गरीब के बेटी की विदाई

गरीब के बेटी विदाई झूठे दिखावे में प्रपंचों को झुठलाना होगा षड्यंत्रों के पोलो को  चतुराई से खोलना होगा लोग कुछ भी कहें भौंकने दो उन्हे  बेतहाशा मुंह में  राम बगल में छुरी को पहचानना होगा। गरीब की बेटी है उसे शादी तो करनी ही होगी शान ओ शौकत में दोहरी जिंदगी का सच जानना होगा कोई बाप दहेज ना जुटने से आत्महत्या क्यों करे भला दहेज के लालचियों का सामाजिक बहिष्कार करना होगा। घर के प्रोग्राम को  घर में ही निपटाना होगा आलीशान बैंक्वेट हॉलों का चकाचौंध ठुकराना होगा अपनी बेटी बहु मां बहन महफूज और खुशहाल रहे इस बाबत ख्वाब से हकीकत जमीं पर देखना होगा। फिल्मी तमाशे ,बेतहाशा रस्में  रिवाजें दिखावा ना होगा संस्कृति सभ्यता  की कुरीतियों को मिलकर  मिटाना होगा समाज ना सही परिवार को ही साथ लेकर चलो बुजुर्गों के आशीर्वाद से घर  को स्वर्ग बनाना होगा। : अपने सामर्थ्य के मुताबिक ही पांव पसारना होगा दुनिया की वाहवाही को अब ठुकराना होगा महज घी के दीये से ही रुतबा कायम क्यों हो गुंजन फर्ज की राह में तेल का  ही सही दीपक जलाना होगा।।©

"बेटा बेटी दोनो बराबर"

"बेटा बेटी दोनो बराबर" धोती  बन गई  जींस री भैया , साड़ी बना पतंग। ब्रांडेड फटे चिथड़ियां पहने नाचें फिरें मलंग ।। अर्ध नग्न वस्त्रों की फजीहत  कहीं हुए निर्वस्त्र । कमर कसे रणवीर ना कमतर कहें पुरुष का शस्त्र ।। विद्या बोली आंख सेंक लें  करतब हिम्मत जान । भर भर वस्त्र मिले डोनेशन बॉयकट से अनजान।। संविधान से मिली समानता महिला पुरुष समान। नारीवादी आंदोलन  से अब  मांगे पुरुष आयोग ।। बड़ी बुराई करें फजीहत जनता भर आक्रोश। भीड़ की शक्ल ना कोई सूरत  रहते नहीं खामोश।। जज करते हैं ऐसे ना वैसे कैसे काम चलेगा । बोल्ड हीरोइन एक्ट्रेस देखें क्यों ना बवाल मचेगा।। हम करें तो कैरेक्टर ढीला तुम जो करो वो मान्य । बेटा बेटी  दोनो बराबर ना हो अब अन्याय।।

श्रीकृष्ण महाकाव्य अक्रूर द्वारा कृष्ण के दिव्य विराट रूप की स्तुति

हे चतुर्भूजा धारी नारायण लक्ष्मीप्रिये वत्सल भगवन। तुम्हरी जय हो माधव कृष्णम राधापति मुरलीधर भगवन।। सुर लोक के नायक काल विनाशक ब्रम्हा विष्णु शिव एकेश्वर । करो कृपा दृष्टि प्रभु नटनागर  अक्रूर  विनय सुनो सर्वेश्वर ।। हे कमलनयन अदभुत लोचन पितांबरधारी  ब्रजभूषण । विनसे मद लोभ कटे जम फंद  भजूं गोविंद श्री नारायण। । अक्रूर विराट स्वरूप लखे  कर जोरि विनय करे अभिनंदन। तुम्हरे  यश गावत वेद  है हारत ऋषि मुनि देव करें वंदन ।। मायापति कृष्णम नमामि भगवन मानस प्रेम हो गोविंदम। व्रजवासी आनंदित गोकुल हर्षित घटवासी करो सुमंगलम ।। चंद्रादि सूर्य नेत्र तिहारे ,दिवस रात्रि अपलक पलक । मुखड़ा है अग्नि ,नाभि अंबर , विराट रूप निर्लिप्त कमल ।। कानन दिशाएं, स्वर्ग शीष , भुजा देवगण , कुक्षि: जलधाम । वायु है जैसे प्राणशक्ति प्रभु , वृक्ष  औषधि  सर्व  रोम।। राधा के मोहन नंद दुलारे , यशोमति  प्रिय   देवकीनंदन। मेघा है केश ,नख अस्थि गिरि ,जस जीव आश्रय जलाशय।। कच्छक , मत्स्य, वाराहरूप , हयग्रीव, नरसिंह  धारते । अवतार युग युग  सर्व श...