तितली बन उड़ जाऊं मैं , डाल डाल पर ईतराऊं । रंग बिरंगे पंख हैं मेरे उपवन को मैं महकाऊं ।। मैं उड़ बैठूं घर आंगन और फुलवारी की क्यारी में। मुझे पसंद है पुष्प महकते खिलते हुए बागानों में ।। मेरा घर एक बगिया पूरी , लहराती हरियाली में। चिड़िया, कोयल ,मोर ,पपिहा भरी बिरादरी टोली में।। मैं भाती हूं बच्चो को बेशुमार चहकते होते मगन। मुझे पकड़ने दौड़े आते मैं उड़ जाऊं नील गगन।। लोग अनोखे लगते मुझको , मेरा चमन गुलजार है। मुझे भगाते यहां वहां से बाग बगीचे खलिहान हैं।। मेरी प्रजाति मेट रहे हो बाग बगीचे काट रहे हो । गौरैया को विलुप्त किए मेरी भी प्रजाति मेट रहे हो।। इस धरती पर जीना मेरा बना दिया उपहास । मुझे देखने को तरसोगे बन जाऊंगी इतिहास ।।
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