एक बार काशी नरेश ययाति नें ऋषियों का अपमान करके अपने बल और शौर्य के मद में चूर होकर रघुकुल के सम्मान को ठेस पहुंचाया था और इस दृष्टता के कारण प्रभु राम ने शपथ लिए की काशी नरेश को उनकी दुष्टता का दण्ड देंगे ।अब अपने प्राण बचाकर राजा ययाति यहाँ वहाँ भागे अंततः उन्होंनेे छल से अंजना के घर आश्रय लिया जो हनुमान की माता थी। और शरणागति की रक्षा का वचन लेकर माता को प्रतिबद्ध कर दिया। प्रभु राम ने भी हनुमान को माँ के पास भेज दिया कि पहले माँ पुकार रही हैं तुम मेरी सेवा छोड़ो और माँ की आज्ञा मानो! यहाँ हर तरफ से हनुमान पर ही। तलवार लटक रही थी । जब हनुमान कुटिया में गए तो ययाति को देखकर प्रभु राम को सौंपने की बात कही तो माता ने शरणागति की रक्षा के वचन में बांधकर हनुमान को विवश कर दिया। अब गुप्तचरों से ज्ञात हुआ कि हनुमान ने विद्रोह कर दिया है । और राम की सेना हनुमान की ओर बढ़ने लगी। हनुमान ने सैकड़ों सेना को मार गिराया । और राजा ययाति हनुमान की प्रसंशा करने लगे तब हनुमान को क्रोध आया और राजा को बोला अपनी चिंता करो ना कि मेरा गुणगान करो । ऐसे में राजन ने पूछा कि ......
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