* बीज धरती पर गिरे ढक जाए बाह्य जो आवरण एक नियत अवधि में उठे जागृत हुआ वह अनावरण इंसान बाधाओं में भी हंसकर बढ़े नित सुगमतम मिल जाएगा एक दिन मुकाम धीरे सही पर सहजतम *तूफानों की कश्ती बड़ी भारी विपत्ति पास हो आंखों के आगे विवशता के पर खुले अंदाज हों उड़ने दो उन परों को जो बाधाओं ने फैलाये हैं प्रबल इच्छा से क्षितिज को तुम नया आयाम दो ।। * अयोध्या राम जी का गढ़ , हिंदुत्व की यह निशानी है जो हिस्से में मिला हमको बहुत उपकार भारी है विवादों में था सालों से घिरा निर्णय अधूरा जो बनेगा राम मंदिर अब , हुई पूरी तैयारी है ।। *बनारस का छटा अनुपम, सीप सा चमकता पानी योग के तेज से ओजस , समन्वय सांस्कृति अपनी सैलानी जब यहां आते करें अर्चन विनय कर जोड़ कि भारत की अनूठी शान दुनिया ने स्वीकारा है ।। * प्रेम दिल में रखो हर पल, नहीं उपजे बैर का शूल मर्यादा सभ्यता संस्कृति का हो सदा सम्मान इंसानियत नहीं है नफरतों के आग में जलकर कि ढह जाएंगे सब बैरी टीले सद्भावना भर कर ।। * भक्ति करो तो शबरी जैसी हठ करना ध्रुव तारा ...
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