कौन से पाप प्रहार किए हैं कि कौन से पग उद्धार करेंगे
कौन से संत सहज होंगे ज्ञानी कौन सुमति का ज्ञान कराए
पंथ हुए चहुं ओर ना सूझे कि कौन से गुरु सत्संग में जाएं
मति रचो हरि लीला अनोखी कि प्राणी नरक से पार ना पाए
धर्म विशुद्ध था होगा विशुद्ध नहीं पाप उसका मान घटाए
दंगे फसादों में और अपराधों में आतंक दुष्ट दुराचारी जो छाए
धर्म ध्वजा धरती पर सुहाए नहीं नर नारी में भेद कराए
मानव धर्म का ज्ञान कराए कोई संत सन्यासी संसर्ग पाएं।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें