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हमारा साथ एक ख्वाब रहा

  तुम्हारा आना जाना लगा रहता है तो सुनो हमेशा के लिए हमारा दामन छोड़ दो ना मजबूरियों का बेहिसाब रोना अच्छा नहीं अपनी तकदीर को कोसना छोड़ दो ना जब सालों से ब्लॉक किया था तुमने हमें तो आज क्यों अनब्लॉक किया बताओ ना तुम जानते हो कि अब कोई फायदा नहीं तो आज फिर से हमें  ब्लॉक कर दो ना तुम्हारी खामोशी जो तकलीफ देती थी हमें  अब यूं ही खामोश रहना सीख लो ना जहां भी रहो अपनी दुनिया में खुश रहो हमारी यादों को जहन से मिटा दो ना मत करो अपनो को नाराज हमारे लिए एक बार फिर से हमे ब्लॉक कर दो ना हम जी रहे हैं और  जी लेंगे तुम्हारे बिना हमारा साथ एक ख्वाब रहा मान  लो ना वक्त बेवक्त जहन  में आ ही जाते हो तो सुनो हर लम्हा हर घड़ी हमें सोचना छोड़ दो ना
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गांव सिर्फ याद के लिए हो गए

 शहर रोजगार के लिए हो गए गांव सिर्फ याद के लिए हो गए।। वो महुआ वो आम वो काफ़ल वो बगिया वो मचान वो पगडंडी यादगार हो गए शहर में अपने गैर और गैर मददगार हो गए संयुक्त परिवार का बिखेर रिश्तो में विक्षोभ हो गए।। बच्चे उड़ चले डिग्रियों के पर लगाए बुजुर्गों पर सितम ऐसा घर उजाड़ हो गए ।। ये पेट की भूख दाने दाने और निवाले को जूझना सरकारी नीतियां और दावे सब बेकार हो गए ।। गांव सिर्फ याद के लिए हो गए।।

मेरे सोणे पिया (श्रृंगार काव्य)

मेरे सोने पिया बात सुन ले जरा ,तेरे दिल में मेरा एक मुकां चाहिए वो जो श्रृंगार है प्रेयसी के लिए ,सारे सौंदर्य तुझसे आ मुझमें बसा तेरे बढ़ते कदम के कदमताल से ,मेरे जीवन में खुशियों की बरसात है सारे रिश्ते हैं गफलत के दर्द ए सितम, संग तेरे  इश्क मेरा मुकम्मल हुआ तूं जो संग हो कोई गम ठहरता नहीं ,एक बुरा दौर अश्कों से धुलता गया प्यार भिक्षा नहीं मांगो मिल जायेगा ,प्यार किस्मत से मिलता है जाना पिया मेरा कल तक जो था आज मेरा नहीं ,किंतु हर्षित हूं तेरे  सिवा और नहीं प्यार दिल की दुआ है दवा भी यही , प्यार ईश्वर की अनुपम वरदान है हर घड़ी प्यार खुद से भी ज्यादा करूं ,धर्म कर्म ज्ञान से हो समन्वय पिया ©®                    

बिखकर संवरना ही जिंदगी है

 तकलीफों से लड़ना ही जिंदगी है । पतझड़ के बाद भी जिंदगी है ।। अश्क जब पत्थर बनकर थम  जाए। जज्बातों पर काबू पाना ही जिंदगी है ।। ना हो मायूस  कि उजड़ा जहां है तेरा। आशा का गुल खिलना ही जिंदगी है ।। राख के ढेर से माथे का तिलक सजा। ख़ाक से चिंगारी होना ही जिंदगी है ।। दौर  बुरा ही सही ना हताश होना । कर्म और भाग्य का खेल ही जिंदगी है।। कुछ रिश्ते बचाने  के खातिर ही सही। अपनों से हार जाना ही जिंदगी है ।। यूं हालातों से अंत  तक ना हार मान । तकलीफों से लड़ना ही जिंदगी है ।। उम्मीदो का चराग ना बुझ पाए "गुंजन"। बिखरकर खुद में संवरना ही जिंदगी है ।। @shabadgunjan

दुल्हन अब बारात ले गई (हास्य रचना)

 मानसरोवर साहित्य अकादमी हास्य रस पेशकश............. दुल्हन अब बारात ले गई , दूल्हा अपने साथ ले गई। दान दहेज कार मर्सिडीज ,सिगरेट वोडका साथ ले गई ।। महंगे महंगे रेस्टोरेंट में , पिज्जा बर्गर ऑर्डर करके  । भंग धतूरे चरसी गांजा , चढ़ा के टल्ली आज हो गई ।। खाओ ससुर जी अंडे मछली पियो शराब मां सासू जी । जैसे तैसे पटा के घर को मॉडर्न हसबैंड मॉल ले गई ।। मर्सिडीज की महंगी कार सरपट रोड पर चले दानंदन। हाई स्पीड से सिग्नल तोड़े मूड बनाए शॉपिंग हो गई ।। दिल धक धक करे सिग्नल तोड़े, महंगी गाड़ी हत्थे लगी। पति का हाए माथा टनका, ट्रैफिक पुलिस पास आ गई।। कटा चालान हुआ हंगामा कहा पति तुम रील  बना लो  हाई हील में बहु उतरकर ट्रैफिक पुलिस के ऊपर गिर गई।। चकमे पर दे चकमा चश्मा  हाए ये तेरा काला चश्मा । माना पति करतब पत्नी की चोर पुलिस साठ गांठ हो गई।। निडर दबंग बहु आधुनिक हुस्न अदाएं कमाल दिखाए। चर्चे किस्से वाह वाह ये नई बहू क्या कमाल कर गई ।।

हास्य गीत छोरी और छपरी

  जब मेकप में  लडके  लड़कियों को देखते हैं तो आह और वाह दोनो से रूबरू होते हैं  इसी पर आधारित एक हास्य काव्य है  छोरी और छपरी ......... क्या खूब लगती हो बड़ी विचित्र दिखती हो रंग गोरा है लेकिन क्यों नाखुश सी दिखती हो ये मेकप शेकप से बढ़िया (सीधी साधी ही रहना)2 हाए....!चक्कर खा  गिर गया वो छोरा .....माशाल्लाह!! अब चूंकि लड़की को गुस्सा आ जाता है और कहती है कि तुम्हारी तो अकल ठिकाने पर होनी थी   .......... कि........ चेहरा क्या देखते हो  (घुटने में मेमोरी हमारी है) (२) हमसे अकलमंद हो  तो हम पर क्यों लट्टू  होते हो हमें कायाकल्प  सौंदर्यनीखार(पार्लर में देखा तो )२हाए..  चक्कर खा  गिर गया वो छोरा .....माशाल्लाह!! समस्या इतनी गंभीर नहीं है जितना की हम अनुमान लगाते हैं .........थोड़ा अकल से काम ले तो बहुत से हादसों का शिकार होने से बच सकते हैं ..... थोपे लिपिस्टिक जुल्फें कैरेटिन नकली नखून रंगे बलखाती मदमाती छोरी के पीछे कितने छपरी पड़े ब्यूटी प्रोडक्ट्स  हाई हील (अदाओं में उलझा गुंजन)2 हाए....! चक्कर खा  गिर गया ...

ठौर तेरा परमपद हो मुक्तक काव्य

  भक्ति में भाव विकृत हो तो ठोकर से जगाना तुम तेरी सेवा  से मन भटके  तो दर्शन से उठाना तुम मेरे अंग संग सदा रहना मेरे  अंतस में हे ईश्वर खुशी के अंगिनत पल मे  माया से बचाना तुम।। ये पल मेरा हो अंतिम तो सफर में तुम ही संग रहना   मुझे खुद से गिला ना हो  सहायक तुम सदा रहना कठिन पल हो या दुःख घेरे या रौनकें हो जमाने की कमल पुष्पों सा  मन निर्लिप्त निर्मोही मुझे रखना।। छणिक सुख में जो भूलूं मैं तेरा दीदार मुश्किल हो विषय सुख में ये फूले मन तेरी रहमत आसां ना हो अगर दुनिया के सुख में मन सदा डूबा रहे फिर तो मुझे देना जन्म  दूजा  ठौर तेरा परम पद हो । ।