मानसरोवर साहित्य अकादमी
हास्य रस पेशकश.............
दुल्हन अब बारात ले गई , दूल्हा अपने साथ ले गई।
दान दहेज कार मर्सिडीज ,सिगरेट वोडका साथ ले गई ।।
महंगे महंगे रेस्टोरेंट में , पिज्जा बर्गर ऑर्डर करके ।
भंग धतूरे चरसी गांजा , चढ़ा के टल्ली आज हो गई ।।
खाओ ससुर जी अंडे मछली पियो शराब मां सासू जी ।
जैसे तैसे पटा के घर को मॉडर्न हसबैंड मॉल ले गई ।।
मर्सिडीज की महंगी कार सरपट रोड पर चले दानंदन।
हाई स्पीड से सिग्नल तोड़े मूड बनाए शॉपिंग हो गई ।।
दिल धक धक करे सिग्नल तोड़े, महंगी गाड़ी हत्थे लगी।
पति का हाए माथा टनका, ट्रैफिक पुलिस पास आ गई।।
कटा चालान हुआ हंगामा कहा पति तुम रील बना लो
हाई हील में बहु उतरकर ट्रैफिक पुलिस के ऊपर गिर गई।।
चकमे पर दे चकमा चश्मा हाए ये तेरा काला चश्मा ।
माना पति करतब पत्नी की चोर पुलिस साठ गांठ हो गई।।
निडर दबंग बहु आधुनिक हुस्न अदाएं कमाल दिखाए।
चर्चे किस्से वाह वाह ये नई बहू क्या कमाल कर गई ।।
खुशियों से भरा हो लाखों पल ,कहीं नैन नमी से युक्त रहे झरझर बरखा जो बून्द पड़े , फिर भी अंगना हो अनल तले नभचर ख़ग दाना- दाना को ,अन्न नीर बिना जैसे तरसें विचरे नभः में पंखे लहरा , उन्मुक्त गगन से दूर चले जो क्षितीज दिखे पंखों के परे ,भानू किरणों से तपता रहा अंकित जो करूँ दुःख का बादल ,चहुँ ओर घिरे पर भीग रहे ना उड़ पाया न ठहर सका, हर तरफ ही नीड़ तलाश रहा बेबसी के काले बादलों ने ,सपनों की उड़ानें रद्द कर दी चंचल ऋतुओं का क्या कहने,बेवक्त मिजाज बदल बैठे बेमानी लगे सावन भी उसे ,वो मयूर नहीं जो थिरक सके पंखें भीगी नम नैन हुए, किस ओर दिशा में नीड़ बसे। गायत्री शर्मा
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