अध्यात्म एक रहस्य
अध्यात्म रहस्य अति गूढ़ है,अपनी मति से जान
जितनी आंतरिक यात्रा, उतनी ही पहचान
अध्यात्म अलौकिक ज्ञान है ,विज्ञान फेल हो जाय
स्वांसों की इस डोर को , पकड़ सके ना कोय
साधना के आकाश में प्राण-अपान के बीच
योगी साधक ,साधिका ,साधे प्राण की डोर
स्वेच्छा मृत्यु सहज योग, काल खड़ा जब पास
काल के धावा बोलते , योगी हो लवलीन
जल समाधि राम लें लक्ष्मण सरयू आये
वाणशैया पर लेटे ही भीष्मपितामह जाये
विवेकानंद समाधि में प्राण साध जग छोड़े
गुरु मिले सम परमहँस , सहज योग तब होय
अध्यात्म सहज क्रिया-कर्म, तंत्र-मंत्र ना जान
भूत-प्रेत ,सब देवता , मोक्ष तत्व से दूर
मानव का तन दुर्लभ है , मिले ना बारम्बार
टूटा हुआ पत्ता नहीं , कभी शाख पर आये
लाख़ 84 जन्म है , जीव काल का ग्रास
आत्मज्ञान जब तक नहीं, नर ना तरे भव पार।।
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