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अगस्त, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रहस्यमयी गर्ल्स हॉस्टल (भाग-2)

रहस्यमयी गर्ल्स हॉस्टल (भाग-2) अनुषी की मौत का सच  सामने आ चुका था । गीतांजलि मैम जैसे ही आंख खोलती  हैं अपने सामने रूचि को देख एक पल को अनुषी समझ बेड से गिर जाती हैं ,डर उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था ....माथे से पसीने टपक  रहे थे  और गिरने से उनको चोट आई थी जो अब आभास नहीं हो रहा था उस वक्त वह गहरी नींद से जागी थी और रूचि इस बार उनके सारे राज जान चुकी थी किन्तु......रूचि का इस तरह बूत बनकर खड़े रहना गीतांजलि के शक को मजबूत करता गया ,उन्हें एक और डॉ सताने लगा कि कहीं रूचि ने उनका बड़बड़ाना सुन तो नहीं लिया....? क्या रूचि को अनुषी के मौत का सच पता चल चुका है ...? अपने ही बनाये षड्यंत्रों में। आज वह बुरी तरह फंस चुकी थी ....गीतांजलि मैडम सोचते हुए ,,,,,,  अपने आप को संभाला और फट से उठकर अपने  बेड पर बैठ गई और बूत बनी  रूचि की तरफ झल्लाते हुए,,,,,, 'तूँ यहां क्यों खड़ी है ....मेरा मजाक उडाने आयी है...' क्यों ..? चल जा अपने कमरे में ! रूचि जैसे ही मुड़ी मैडम ने फिर आवाज लगाया ..'सुन लड़की ' .....रूचि पीछे मुड़ी ...मैडम ने कड़े चेतावनी के साथ बोला"अगर तूने किसी को क...

रहस्यमयी गर्ल्स हॉस्टल ( भाग 1)

रहस्यमयी गर्ल्स हॉस्टल ( भाग 1 ) कमरे में गहन अँधेरा छाया हुआ था बिजली के पोल में शॉट लगने से बत्ती गुल हो गई थी और रूचि को अपने कमरे में जाने से डर लगने लगा , वो खाना खाकर सोने जा रही थी कि उसने भयानक चित्कारी सुनी ! आआआआह,,, ऊऊई,,,, मेरा दम घूंट रहा है ...'' "रुचि...!मैं यहां हूँ... मुझे बचा लो...वरना वो औरत मुझे मार देगी....' रूचि ..बिलकुल सन्न' 'चौकन्नी होकर चारों तरफ देखने लगी.... यहां..वहां...नीचे....ऊपर.... ऊफफ़्.... अँधेरे में तो वो खुद को ही नहीं देख पा रही थी कि पुकारने की आवाज बढ़ती ही जा रही है ...जैसे कोई रूचि के आस पास हो.... रूचि डर के मारे नीचे भागती हुई...' सीढ़ियों पर लड़खड़ाते पैर और माथे पर पसीना टपक रहा था । जैसे-तैसे साहस करके नीचे हॉस्टल के प्रथम तल पर पहुंच गयी ,उस वक्त सब गहरी नींद में सो रहे थे रूचि चिल्लाते हुए ,,, कोई है.....?? बचाओ......! मुझे डर लग रहा है , मैंने किसी की आवाज सुनी वो बहुत विकराल स्वर में जैसे मुझे मदद को पुकार रही थी .....'' आवाज में एक अलग तरह का खौफ़ था उसकी आवाज भी स्पष्ट नही लग रही थी  कि वार्...

बाल्मीकि आश्रम मे सीता का आगमन

  वाल्मीकि जी को एक बार ब्रम्हा की भविष्यवाणी सुनाई दी  कि भगवती लक्ष्मी का मानवीय प्रतिरूप सीता का वन गमन होगा और ब्रम्हा जी के कथन के अनुसार महर्षि को ही सीता की देखरेख करनी है एक निश्चित समय तक जब तक कि यह कलंक ना  मिट जाए। महर्षि की तपस्या सफल हुई वह साक्षात भगवती को पुत्री के  रूप में पाकर धन्य हो गए। शायद भी तय था कि महर्षि की कोई पुत्री नही थी तो यह इच्छा भी साक्षात भगवती को ही पूरी करनी थी ।  मां हमेशा अपने भक्तो का ख्याल रखती है । इसलिए तो वह चाहती तो सीता के रूप मे अपने मायके जाकर पुत्रो को जन्म दे सकती थी किन्तु नियति का हर कदम भक्तों के लिए सुखदाई रहा। वहीं दूसरी तरफ लक्ष्मण आहत थे  कि राम ने अन्याय किआ , सीता भाभी के त्याग को नही देखा उन्हें अकेला छोड़ दिया वन में। तब  वो रुष्ट होकर महल छोड़कर  चले गए । लक्ष्मण नहीं जानते थे कि इन घटनाओं के पीछे  क्या रहस्य  छिपा था। । दरसल सतयुग में  श्री हरि को श्राप मिला था एक बार 10 देव दानव संग्राम हुआ जिसमें  देवता जीत गए और असुर हार गए । कुछ राक्षस  बच गए वे भाग गए और भृग...