रहस्यमयी गर्ल्स हॉस्टल ( भाग 1)
कमरे में गहन अँधेरा छाया हुआ था बिजली के पोल में शॉट लगने से बत्ती गुल हो गई थी और रूचि को अपने कमरे में जाने से डर लगने लगा , वो खाना खाकर सोने जा रही थी कि उसने भयानक चित्कारी सुनी !
आआआआह,,, ऊऊई,,,, मेरा दम घूंट रहा है ...''
"रुचि...!मैं यहां हूँ...
मुझे बचा लो...वरना वो औरत मुझे मार देगी....'
रूचि ..बिलकुल सन्न' 'चौकन्नी होकर चारों तरफ देखने लगी.... यहां..वहां...नीचे....ऊपर....
ऊफफ़्.... अँधेरे में तो वो खुद को ही नहीं देख पा रही थी कि पुकारने की आवाज बढ़ती ही जा रही है ...जैसे कोई रूचि के आस पास हो....
रूचि डर के मारे नीचे भागती हुई...' सीढ़ियों पर लड़खड़ाते पैर और माथे पर पसीना टपक रहा था ।
जैसे-तैसे साहस करके नीचे हॉस्टल के प्रथम तल पर पहुंच गयी ,उस वक्त सब गहरी नींद में सो रहे थे रूचि चिल्लाते हुए ,,,
कोई है.....?? बचाओ......! मुझे डर लग रहा है , मैंने किसी की आवाज सुनी वो बहुत विकराल स्वर में जैसे मुझे मदद को पुकार रही थी .....''
आवाज में एक अलग तरह का खौफ़ था उसकी आवाज भी स्पष्ट नही लग रही थी कि वार्ड के सभी लड़कियाँ और महिला कर्मी आनन-फानन में उठकर बैठ जाती हैं वो कुछ देख पाती कि 'बत्ती गुल'!
कककौन...? नविता मैडम जम्भाई लेते हुए 'लड़खड़ाते स्वर में' बोलीं,,,
उनकी नींद अब उचट चकी थी किन्तु कुछ दिखाई नही दे रहा था । रूचि आवाज की तरफ भागती हुई.....
मैडम के पास पहुंची ,मैडम जैसे ही बेड से खड़ी हुई पैरों में चप्पल डाला नहीं कि वो चप्पल ढूंढते-ढूंढते रूचि से टकरा गईं और जोर से चीख़ निकली आ...आ...आ....''
इस बार तो डबल चीखें गूंज पड़ी , रूचि और नविता मैडम की ...' अब तो पूरा हॉस्टल हॉन्टेड हाउस की तरह बन गया था । एक तो लाइट नहीं ऊपर से एक दूसरे को देखकर डरना .... चिल्लाना ...., यह सब क्या हो रहा है???
क्या मजाक लगा रखा है,,, "अनुराधा मैडम जो हॉस्टल इंचार्ज थी उन्होंने तिलमिलाते हुए 'बोला',,,,,
अनुशासन नाम की कोई चीज है कि नहीं ....लाइट ही तो गयी है आ जायेगी ,इसमें पूरा हॉस्टल सर पर उठाने की क्या जरूरत है ...?आप लोग पढ़े-लिखे हो और जाहिलों की तरह चिल्ला रहे हो ! शर्म आनी चाहिए।
सब के सब चुप्पी साधे एक दूसरे के कानों में खुसर-फुसर कर रहे थे ।
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रात के उस अँधेरे में कोई लड़की जिसने सफेद सूट पहना हुआ है उसके हाथ में एक जलती हुई मोमबत्ती थी ,बाल खुले हुए और नजरें झुकी हुई ,नंगे पैर धीरे-धीरे चलकर
अनुराधा मैडम के पास गयी और उनके कमरे में पास में रखे टेबल पर वो मोमबत्ती रखकर जाने लगी .....' तभी अनुराधा मैडम की नजर उस पर पड़ी । वो लड़की पीछे मुड़ चुकी थी जिस कारण उसका चेहरा नहीं दिख रहा था अनुराधा मैडम ने कहा ,,,,,
''थैंक यू बेटा '' और मैडम सोने को दूसरी तरफ मुंह करके लेट गई ।
तपाक ....! उस लड़की ने बोला " वेलकम मैम ".....स्वर में काफी भारीपन था और पूरा कमरा उस स्वर के इको से गूंजने लगा ...मैडम उठकर बैठ गईं और दरवाजे की तरफ देखा ! वह लड़की जा चुकी थी ।
मैडम सोच में पड़ गईं और सामने रखे खाली गिलास में पानी निकालकर पीने लगीं ।
गटर...गटर....गटर.... एक ही साँस में पूरा गिलास ख़ाली ।
जैसे कि कोई बहुत प्यास से तड़प रहा हो किन्तु यह प्यास नहीं भय के आवेश में यह प्रतिक्रिया हुई ।
अनुराधा मैडम ने उस गूंजते 'वेलकम ' की आवाज को अनुषी की आवाज समझ बैठी थी ।
अनुषी को गुजरे 2 साल पूरे हो चुके थे उसने यहीं हॉस्टल के एक कमरे में ख़ुदकुशी की थी मैडम सोचते हुए ,,,
तभी लाइट भी आ जाती है उनको सुध नहीं रहता कि मोमबत्ती जल रहा है कि बल्ब ...'
अनुषी की मौत का रहस्य तो सभी को मालूम था जो वहाँ सीनियर लेडी कर्मचारी थीं किन्तु यह नहीं मालूम था कि उसकी मौत एक ख़ुदकुशी न होकर सोची समझी रणनीति के तहत तय की गयी थी ।
प्रातः हॉस्टल के सभी कर्मचारी महिलाओं , वहां की रहने वाली लड़कियों ,खाना पकाने वाली ,सफाई एवं देखरेख करने वाली सभी कर्मचारी महिलाओं को अनुराधा मैडम हॉल में उपस्थित होने को कहती हैं...' मात्र आधे घण्टे के भीतर......
रूचि तो पहले ही डरी हुई थी ,अब क्या बवाल मचेगा ....सुप्रिया से कहते हुए,,,,,
सुप्रिया...! सुनो...!ये अनुराधा मैम ने सबको क्यों बुलाया ? कहीं मुझे सबके सामने पनिशमेंट तो नही देंगी? जाने क्या होना है ,मैं तो सच-सच बता दूंगी जो होगा देखा जायेगा । मैं यहां और नही रहूंगी यह भ्भ्भूतिया हॉस्टल है ........! लड़खड़ाते स्वर में ,,,,,
रूचि की बात सुनकर सुप्रिया हैरान हुई और उसने कहा"पागल यहां नहीं रहेगी तो पढ़ाई पूरी कैसे करेगी ? अक्ल से काम ले ! चल... ज्यादा मत सोच !
अब सब हॉल में उपस्थित थे ।
मैडम ने सबको सम्बोधित किया और कहा हमारा हॉस्टल बीते कुछ दिनों से चर्चा में है ...मुझे शर्म आती है कि हमारे बच्चे और बड़े भी इस होस्टल को हॉन्टेड हॉस्टल की तरह देख रहे हैं और यही सब चलता रहा तो अच्छा नहीं होगा ।
कोई कुछ कहना चाहता है तो खुलकर अपनी बात रख सकता है ....! ध्यान रहे ! दुबारा ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए । सब चुप्पी लगाये भाषण सुनकर अपने-अपने रुम में चले गए ।
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अनुराधा मैडम काफी थक चुकी थी दिनभर के काम और थकान से चूर अपने चेयर पर बैठे -बैठे सो गईं ।
सन्नाटा ,,,,, एक बार फिर दरवाजा ऑटोमैटिक बन्द हो गया ।
गीतांजलि जो पुरानी कर्मचारी थी उसको कोई घसीट कर हॉस्टल के बाहर ले जा रहा है ....कककौन.....है....??
अनुराधा मैम बोली ,,,
गीतांजलि मैम" बचाओ...बचाओ..... कोई है ...?
अनुराधा मैम कड़क स्वर में " गीतांजलि मैडम आप डरिये नहीं कोई नहीं है....कुछ नहीं होगा आपको....वो सपने में बड़बड़ाती रहीं ।
'अनुषी मुझे मत मारो 'चिल्लाते हुए.....'
मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है वो तो ठाकुर के कहने मैंने ये सब किया था ....मेरी मति मारी गई थी पैसों के लालच में मैंने उसका साथ दिया था । मुझे नही मालूम था कि तुम्हारी जान चली जायेगी । तुम्हारे पिता की जायदाद के पीछे ठाकुर सालों से लगा था ...कि किसी तरह वो तुम्हे रास्ते से हटाकर सारी जायदाद अपने कब्जे में ले ले ।
इसी लालच में पड़कर मुझसे गलती हो गई जो उस पापी की मदद की।
मुझे छोड़ दो....हाथ जोड़ते हुए...पैर पटकते हुए ....मौत के करीब पहुंचकर गीतांजलि मैम जीवन की कामना करती हुई ....अब जीवित नहीं बचूंगी । और जोर-जोर से चिल्ला रही है ....शायद कोई सुन रहा था ! कौन था वो ...???
क्या अनुराधा मैडम गीतांजलि मैडम को बचा पाएंगी...?
क्या अनुषी का बदला पूरा होने वाला था.....?
रूचि जिसे अनुषी ने बचाने के लिए आवाज लगाई थी क्या वो सारा वाकया जानती थी......?
किसी से कहा क्यों नहीं ......?
ठाकुर का अगला शिकार कौन था.....?
ऐसे अनगिनत सवाल थे जिनसे पर्दा उठाया जाना था
वह गर्ल्स हॉस्टल रहस्यों से भरा हुआ था ।
क्रमशः............
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