गरीब के बेटी विदाई
झूठे दिखावे में प्रपंचों को झुठलाना होगा
षड्यंत्रों के पोलो को चतुराई से खोलना होगा
लोग कुछ भी कहें भौंकने दो उन्हे बेतहाशा
मुंह में राम बगल में छुरी को पहचानना होगा।
गरीब की बेटी है उसे शादी तो करनी ही होगी
शान ओ शौकत में दोहरी जिंदगी का सच जानना होगा
कोई बाप दहेज ना जुटने से आत्महत्या क्यों करे भला
दहेज के लालचियों का सामाजिक बहिष्कार करना होगा।
घर के प्रोग्राम को घर में ही निपटाना होगा
आलीशान बैंक्वेट हॉलों का चकाचौंध ठुकराना होगा
अपनी बेटी बहु मां बहन महफूज और खुशहाल रहे
इस बाबत ख्वाब से हकीकत जमीं पर देखना होगा।
फिल्मी तमाशे ,बेतहाशा रस्में रिवाजें दिखावा ना होगा
संस्कृति सभ्यता की कुरीतियों को मिलकर मिटाना होगा
समाज ना सही परिवार को ही साथ लेकर चलो
बुजुर्गों के आशीर्वाद से घर को स्वर्ग बनाना होगा।
: अपने सामर्थ्य के मुताबिक ही पांव पसारना होगा
दुनिया की वाहवाही को अब ठुकराना होगा
महज घी के दीये से ही रुतबा कायम क्यों हो गुंजन
फर्ज की राह में तेल का ही सही दीपक जलाना होगा।।©

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें