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जख्मों के हवाले कर दूं

 सोचती हूं जिंदगी को जख्मों के हवाले कर दूं।
कुछ इस तरह  खुद को  मैं मशगूल कर  दूं ।।

उड़ना चाहूं तो इन पैरों में छाले हो अरमानों के
तेरे इश्क में उलझकर खुद को ही जंजीर कर दूं।।

ना खोल सके इश्क ए बेड़ियां दिलों का कोई ।
तेरी खूबियों के किस्से हर दिल अजीज कर दूं ।।

मुझे मेरी फिक्र ना हो  ना तू मुझसे जुदा हो
मैं तुझमें ही फना हो खुद को मशहूर कर दूं ।।

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