शराबी आशिक
जख्मी दिल का हाल तुम्हारा ठीक नहीं
भूलने का ये बहाना अब तो ठीक नहीं
हंसते रोते शाम ओ सहर वो याद आए
याद में उसके घूंट घूंट पैग ठीक नहीं
फूड ब्लॉगर
ये फूड विलॉगर भी क्या कमाल दिखाते हैं
हरकत इनकी जैसे कुंभकरण के भूख सा है
चाहे लड़का लड़की हर भेद मिटाकर के
खाने पर टूट रहे फैन फॉलोइंग बढ़ाते हैं
स्पैमकाल करने वाले
एक मिसकॉल से अलर्ट करते हो तुम
स्पैम एसएमएस से क्यों डिस्टर्ब करते हो तुम
अरे ब रखुरदार खुद को मजनू बताते हो तो सुनो
क्या अपनी मां बहन को ऐसे ही परेशान करते हो तुम।।
एसिड अटेकर्स आशिक
ये एसिड ये तेज़ाब क्या इश्क में यही चोंचले होते हैं
शिद्दत से एकतरफा चाहत के दर्दनाक अंजाम होते हैं
तुम कहते हो बेहद बे इंतहान मोहबत करते हो क्या फायदा
ऐसे शैतानी फिदरत वाले तो हकदार ए जहन्नुम होते हैं।।
चुनावी माहौल के बाद की दशा
लिबास बदल लो एक नया लिबास पहन लो तुम
अपना किरदार बदलकर नया किरदार गढ़ लो तुम
मुखौटे तो हर रोज बदलते हो झूठ फरेब मक्कारी का
अब चुनाव खत्म हो लिए कहो जनता फुट लो तुम ।।
दिलफेंक आशिक
हमें दिल का ऑनर बताते हो मजाक बनाते हो तुम
ख्वाबों में ही आकर सिर्फ झूठे ख्वाब दिखाते हो तुम
कभी खुद को आईने में देखो हकीकत से रूबरू होकर
एक हिना दूसरी टीना रखकर बताओ कितने दिलों से खेलते हो तुम
पानी पूरी की महंगाई
महंगाई महंगाई महंगाई अरे ये कोई मुद्दा बड़ा है क्या
पेट्रोल डीजल कपड़े लत्ते पर ये जीएसटी लाजमी है क्या
बड़े मुद्दों पर ध्यान देते हो और गंभीर मामले को आम बताकर
हम लड़कियों से पूछो ये 20 के तीन गोलगप्पे सस्ते हैं क्या
ब्यूटी प्रोडक्ट पर सवाल
आए दिन एश्तिहार में एश्तिहार छपवाते हो
नए नए प्रोडक्ट से जनता को बेवकूफ बनाते हो
कभी भैंस को फेयर लवली से गोरा बनाए हो तो बताओ
क्यों सुंदर परियों पर ही परीक्षण हर बार करते हो ।
सरकारी नौकरी प्राइवेट स्कूल
एक तरफ दामाद सरकारी मुलाजिम चाहते हो
दूसरी तरफ प्राइवेट नौकरीपेशो का माखौल बनाते हो
यूं तो ख्वाब हवा महल का देखते हो जरा जमी पर उतरो
औकात से ज्यादा की ख्वाहिशें क्यों बेहिसाब करते हो ।।
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