ठंड में ये बयान माना जायेगा ।
पानी छूना भी स्नान माना जायेगा ।।
मकर संक्रांति का इंतजार है जिनको ।
फिल्हाल ठंड का लुत्फ उठाया जाएगा।।
होली तक सर्दी गुजर जाए क्या पता।
मौसम का मिजाज कब बदल जाएगा।।
इग्लू इग्लू बर्फ के गोले से दिखते लोग।
कोहरे की धुंध में हाथ जम जायेगा।।
गीजर हीटर की सुविधा कहां सबको।
अंगीठी जलाकर घरों में बैठा जायेगा।।
ठंड में ये बयान माना जायेगा ।
पानी छूना भी स्नान माना जायेगा ।।
खुशियों से भरा हो लाखों पल ,कहीं नैन नमी से युक्त रहे झरझर बरखा जो बून्द पड़े , फिर भी अंगना हो अनल तले नभचर ख़ग दाना- दाना को ,अन्न नीर बिना जैसे तरसें विचरे नभः में पंखे लहरा , उन्मुक्त गगन से दूर चले जो क्षितीज दिखे पंखों के परे ,भानू किरणों से तपता रहा अंकित जो करूँ दुःख का बादल ,चहुँ ओर घिरे पर भीग रहे ना उड़ पाया न ठहर सका, हर तरफ ही नीड़ तलाश रहा बेबसी के काले बादलों ने ,सपनों की उड़ानें रद्द कर दी चंचल ऋतुओं का क्या कहने,बेवक्त मिजाज बदल बैठे बेमानी लगे सावन भी उसे ,वो मयूर नहीं जो थिरक सके पंखें भीगी नम नैन हुए, किस ओर दिशा में नीड़ बसे। गायत्री शर्मा
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