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मुक्तक , व्यंग्य

 वर्चुअल काव्य पाठ की समय सारणी जब अर्धरात्रि में सेट हो जाए तो

सन्नाटे में  तुम जरा तरन्नुम  का ख्याल रखना
करुण रस को अपने गायकी में आबाद रखना
ओज  के हुंकार  से  पड़ोसी ना जग जाएं कहीं
श्रृंगार की माधुर्यता में हास्य का ख्याल रखना ।।

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