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इश्क और तन्हाइयों का वास्ता(गजल)


इश्क और तन्हाइयो का वास्ता पुराना है यारों
दिलों से खेलने वालों को दरकिनार रखा जाए ।।

जो  कद्र ना कर सके सजदे में आए फूलों का
तो उन्हे उसकी खुशबूओं से महरूम रखा जाए ।।

ना पायमाल हो इश्क ए जुनून में  रख हौसला
कि  मंजर उदासी का वो दौर भुलाया जाए ।।

अंदाज अपना अलग हो महफिल में मुस्कुराने का
तो गमों से कह दो वो होठों की दहलीज से चले जाए।।

जो लड़ सके हालातों से मुस्कुराते हुए  गुंजन
वह शख्स खुद में मुकम्मल किरदार लिखा जाए।।

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