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मन मस्त मगन मन

 


सुख के तिनके तिनके लम्हें दुःख की सांझ में ढलते हों।
राहें कठिन हो हो जाए तुम अपना मनोबल बढ़ने दो।।

खुशियों की उड़ाने रद्द होने से मन का विचलन बढ़ जाए ।
इच्छा मिटे तो मिट जाए खुद पर से यकीं ना मिटने दो ।।

चींटी के लघु क्षमता से हाथी का वजन  ना तोलो तुम।
घायल मन हो हो जाए बस  खुद पर भरोसा रहने दो ।।

थिरक उठे बारिश में मयूर प्रकृति राग सुहानी हो  ।
मूड खराब हो हो जाए मुस्कान अधर पर रहने दो ।।

जीवन के आपा धापी में जब रिश्ते बोझ से लगते हों  ।
 गांठ लगे तो लग जाए कुछ निर्णय वक्त पर रहने दो ।।

धुंध घिरे पथ कोहरे से विजिबिलिटी शून्य हो जाए तो।
कदम डिगे तो डिग जाये प्रगाढ़ आत्मबल रहने  दो।।

वृक्षों से लिपटी लता खिलीं ये हंसी अदाऐं मस्तियां ।
ख्वाब मरे तो मर जाए कुछ नए ख्वाब को बुनने दो ।।

एक मुद्दत से अरमानों के लौ को यूं बहकने दो ’ गुंजन’
हया मिटे तो मिट जाए मन मस्त मगन मन रहने दो।।

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