सुख के तिनके तिनके लम्हें दुःख की सांझ में ढलते हों।
राहें कठिन हो हो जाए तुम अपना मनोबल बढ़ने दो।।
खुशियों की उड़ाने रद्द होने से मन का विचलन बढ़ जाए ।
इच्छा मिटे तो मिट जाए खुद पर से यकीं ना मिटने दो ।।
चींटी के लघु क्षमता से हाथी का वजन ना तोलो तुम।
घायल मन हो हो जाए बस खुद पर भरोसा रहने दो ।।
थिरक उठे बारिश में मयूर प्रकृति राग सुहानी हो ।
मूड खराब हो हो जाए मुस्कान अधर पर रहने दो ।।
जीवन के आपा धापी में जब रिश्ते बोझ से लगते हों ।
गांठ लगे तो लग जाए कुछ निर्णय वक्त पर रहने दो ।।
धुंध घिरे पथ कोहरे से विजिबिलिटी शून्य हो जाए तो।
कदम डिगे तो डिग जाये प्रगाढ़ आत्मबल रहने दो।।
वृक्षों से लिपटी लता खिलीं ये हंसी अदाऐं मस्तियां ।
ख्वाब मरे तो मर जाए कुछ नए ख्वाब को बुनने दो ।।
एक मुद्दत से अरमानों के लौ को यूं बहकने दो ’ गुंजन’
हया मिटे तो मिट जाए मन मस्त मगन मन रहने दो।।
शब्द गुँजन में आप सभी पाठकगणों का हार्दिक स्वागत है । यहाँ प्रकाशित समस्त लेख , कहानी, कविता, मुक्तक, गीत, आध्यात्मिक अभिव्यक्ति , मनोविज्ञान , परामनोविज्ञान आदि समस्त शाखों से जुड़े तथ्य , रहस्य , मेरी स्वरचित स्वतन्त्र अभिव्यक्ति है जिस पर मेरा मौलिक अधिकार है। अतः पाठकों से निवेदन है कि किसी भी तरह कंटेंट्स को तोड़ मरोड़कर अन्यत्र पेश ना करें । अन्यथा दोषी पाए जाने पर कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कार्यवाही की जाएगी । गुंजन अभिव्यक्ति को अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!!
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