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अकड़ को हार जाने दो मुक्तक

 कसक भूल जाना

स्वयं को तुम किसी से भी कभी कमतर नहीं मानो
 हकीकत की कहानी को खयालातें नहीं जानो
अगर ये जिंदगी मझधार में लाकर डुबोए तो
बुरे पल भूल जाओ पर कसक दिल में नहीं  रखो ।।

अकड़ को हार जाने दो

हुनर कुछ खास रखते हो तो मद मन में ना आने दो
नहीं फिरना गुमानी में  छलावा भूल जाने दो
जो पाया है यहीं खोना चाहे राजा भिखारी हो
जुड़ो सद्भाव मैत्रीय से अकड़ को हार जाने दो  ।।

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