कसक भूल जाना
स्वयं को तुम किसी से भी कभी कमतर नहीं मानो
हकीकत की कहानी को खयालातें नहीं जानो
अगर ये जिंदगी मझधार में लाकर डुबोए तो
बुरे पल भूल जाओ पर कसक दिल में नहीं रखो ।।
अकड़ को हार जाने दो
हुनर कुछ खास रखते हो तो मद मन में ना आने दो
नहीं फिरना गुमानी में छलावा भूल जाने दो
जो पाया है यहीं खोना चाहे राजा भिखारी हो
जुड़ो सद्भाव मैत्रीय से अकड़ को हार जाने दो ।।
शब्द गुँजन में आप सभी पाठकगणों का हार्दिक स्वागत है । यहाँ प्रकाशित समस्त लेख , कहानी, कविता, मुक्तक, गीत, आध्यात्मिक अभिव्यक्ति , मनोविज्ञान , परामनोविज्ञान आदि समस्त शाखों से जुड़े तथ्य , रहस्य , मेरी स्वरचित स्वतन्त्र अभिव्यक्ति है जिस पर मेरा मौलिक अधिकार है। अतः पाठकों से निवेदन है कि किसी भी तरह कंटेंट्स को तोड़ मरोड़कर अन्यत्र पेश ना करें । अन्यथा दोषी पाए जाने पर कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कार्यवाही की जाएगी । गुंजन अभिव्यक्ति को अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें