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कवियों की दुखती रग

 कवियों की दुखती रग है ये इश्क
मृग मरीचिका सी होड़ है ये इश्क
सुबह  शाम  दिन रात  ही  रोते
मानो कुदरत का अजूबा भेंट है ये इश्क ।।

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