अहंकार को तजकर जो निष्काम भाव भरपूर भरे
अपने सुख को छोड़ कर गुरु सेवा में लवलीन रहे
अन्तस् आनँद की जननी है सेवा जो निष्काम है
उस पर प्रसन्न हो जाये गुरुवर हो जाए कल्याण है।।
अपने सुख को छोड़ कर गुरु सेवा में लवलीन रहे
अन्तस् आनँद की जननी है सेवा जो निष्काम है
उस पर प्रसन्न हो जाये गुरुवर हो जाए कल्याण है।।
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