विनम्रता मनुष्य का आभूषण है , जो व्यक्ति मन एवं आचरण दोनों से उदार होगा ,वही इन्सान परमेश्वर का प्यारा होगा ।।
परमेश्वर प्रेम है जीवों से प्रेम करो ,उसके संसार को प्रेम बांटो
किसी को ठेस पहुंचाकर हम सुख की कल्पना नहीं कर सकते ।।
गुणी व्यक्ति कभी किसी की बुराई नहीं देखता
यही इन्सान का सबसे बड़ा गुण होता है ।।
अमरत्व का ज्ञान हमें शाश्वत ज्ञान से जोड़ता है
शरीर से मोह समाप्त होना ही मोक्ष का धाम है ।।
विद्युत प्रवाह के लिए ठंडी गर्म तारों का सम्पर्क होता है
ठीक उसी प्रकार ईश्वरीय पॉवर हाउस से जोड़ने के लिए अच्छाई बुराई दोनों का सामना करना होगा ।।
हमारा दिल ही मंदिर,मस्जिद,गिरजा है जहां परमात्मा अपनी रजा में रहता है उसकी रूहानी ताकत हम बंदों को नेकी पर चलाती है ।।
बंजर धरती उपजाऊ बन सकती है , दरिद्र धनवान बन सकता है मरुस्थल में पानी बह सकता है ,परन्तु अहंकारी हृदय में प्रेम उत्पन्न नहीं किया जा सकता ।।
धरती पर पाप बढ़ने पर प्रकृति विध्वंसक हो जाती है मानव दोहन करता है और कुदरत न्याय करती है तो रूह कांप जाती है।।
क्रोध को खुद पर हावी मत करो , प्रेम से व्यवहार करो
अक्सर क्रोधी स्वभाव ज्ञान की धारा को विपरीत बहता पाता है।।
परमेश्वर प्रेम है जीवों से प्रेम करो ,उसके संसार को प्रेम बांटो
किसी को ठेस पहुंचाकर हम सुख की कल्पना नहीं कर सकते ।।
गुणी व्यक्ति कभी किसी की बुराई नहीं देखता
यही इन्सान का सबसे बड़ा गुण होता है ।।
अमरत्व का ज्ञान हमें शाश्वत ज्ञान से जोड़ता है
शरीर से मोह समाप्त होना ही मोक्ष का धाम है ।।
विद्युत प्रवाह के लिए ठंडी गर्म तारों का सम्पर्क होता है
ठीक उसी प्रकार ईश्वरीय पॉवर हाउस से जोड़ने के लिए अच्छाई बुराई दोनों का सामना करना होगा ।।
हमारा दिल ही मंदिर,मस्जिद,गिरजा है जहां परमात्मा अपनी रजा में रहता है उसकी रूहानी ताकत हम बंदों को नेकी पर चलाती है ।।
बंजर धरती उपजाऊ बन सकती है , दरिद्र धनवान बन सकता है मरुस्थल में पानी बह सकता है ,परन्तु अहंकारी हृदय में प्रेम उत्पन्न नहीं किया जा सकता ।।
धरती पर पाप बढ़ने पर प्रकृति विध्वंसक हो जाती है मानव दोहन करता है और कुदरत न्याय करती है तो रूह कांप जाती है।।
क्रोध को खुद पर हावी मत करो , प्रेम से व्यवहार करो
अक्सर क्रोधी स्वभाव ज्ञान की धारा को विपरीत बहता पाता है।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें