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गीत -देवभूमि के प्रहरी

कितना प्यारा स्वप्न तुम्हारा दशकों से एक ख्वाब बुना
देवभूमि उत्तराखंड का प्राचीनतम इतिहास रहा
स्वप्न तुम्हारा  पर्वत की छाती पर छुक-छुक रेल चले
देव लोक का मार्ग दिखाता उत्तराखंड समृद्ध बने।।

प्रकृति की छटा मनोहर पर्वत शीर्ष मुकुट बादल हैं
लोक संस्कृति शोभा न्यारी , नदिया की कलकल धारा है
 देवभूमि उत्तराखंड हमारा गुलमर्ग ,हिमाचल सा सुंदर है
रेल प्रोजेक्ट को स्वप्न ही कहकर हंसते थे जो लोग कभी
आज सभी एक स्वर  में बोलें उत्तराखंड  हमारा है ।।

ऋषियों की यह पावन धरती पुनः आज तैयारी है
पर्यटन को मिलेगा अवसर रोजगार का सृजन हो
थम जाएगा सभी पलायन , और सीमाएं सुरक्षित हों
ख्वाब हकीकत में तब्दील हो , मंजूरी सरकारी है


ऊंची ऊंची नभ को छूती पर्वत की श्रृंखलाओं में
रेल चलेगी जब पर्वत पर कल की इक बुनियाद बने
क्षेत्र सुरक्षित , सीमा  सुरक्षित रोजगार भरपूर मिले
सपन सुनहरे भविष्य की गढ़कर तुमने जो उपकार किया
याद रखेगा जनमानस इतिहास अमर हो जाएगा ।।


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