दूसरों पर खूब दिल खोलकर उड़ाते देखा ,पिता को बखूबी रिश्तेदारी निभाते देखा
झूठे रिश्ता के दम पर ढींगे हांकते रहे इस कदर कि ,खुशामद के चक्कर में अपना घर बिगड़ते देखा
पिता ने कहा मायके ना जाऊंगा ना जाने दूंगा ,मां से उनके ससुरालियों को खंगालते देखा
दादी के अंतिम वचन साथ निभाना भाई भाभी का,इस आखिरी ख्वाहिश से घर परिवार उजडते देखा
मरने वाले विदा हो जाते हैं ख्वाहिशें बताकर,उन ख्वाहिशों के घुटन में जिंदों को मरते देखा
पिता ने पूछा बच्चों से तुम्हे तकलीफ क्या है ,रिश्तेदार ही तकलीफ हैं हमने खुद को घुंटते देखा
माना कि फर्ज में रिश्तेदारी निभाना है जरूरी, लोगों को खुश करते हुए अपनों को लाचार होते देखा

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