अश्क आंखों में हो जरूरी तो नहीं
कुछ नमी सा दिल में होना चाहिए
गम ए सैलाब उमड़ना भी चाहे तो बेशक
दिल के तूफ़ान दिल में ही थमने चाहिए
आंखों से दिल का हाल जान लेते हैं लोग
दर्द के दरिया को थोड़ा सा झुकना चाहिए
बेवजह तकदीर को यूँ कुसूरवार क्यों ठहराना
जिंदगी के खेल को संजीदगी से समझना चाहिए
कि मेहनत के पटाखे ही फूटते हैं जलने वालों पर
जीत के जश्न का पता दुश्मनों को होना चाहिए
इस गफलत में न हो गुम कोई साथ देगा तेरा
गैरों से ज्यादा खुद पर यकीन होना चाहिए
शम्मा जलती है दूसरों के खातिर ही गुँजन
कुछ नेकी कर दुनिया से विदा लेना चाहिए ।।
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