खुद के हालातों से टूटे जो ,वह शख्श भला फिर जिन्दा क्या
लाखो हैं बुलंद फ़साने यहां, फिर भी गफलत में सोना क्या
तूँ दांव चले जा दुनिया में, बाजीगर हार के रोना क्या
पागल रस्ता रस्ता छाने, सब कुछ खोकर अब पाना क्या
ठुकराए बेवक्त तेरा कोई, ले दर्द जिगर में घुटना क्या
उस अतीम से जाकर पूछ जरा , हर हाल में खुश है कहना क्या
वो गरीब अभाव में जिन्दा है, दौलत के पीछे मरना क्या
दो पल की हैं जिंदगी जी ले, ख्वाहिश बेशुमार भी करना क्या
हंसकर हर गम को भुला देना, शिकवा-ओ-शिकायत करना क्या
मत बांध अंधेरों में खुद को ,मायूसी लिए अब फिरना क्या
जीवन का मतलब लड़ना है , अब सोच फिकर में ढलना क्या ।
गायत्री शर्मा
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