ये सच है कि सभी को जाना है कब और कैसे किसने जाना है
भविष्य का ज्ञात होता गर तो ये काल ना होता
काल की निरंतर गति को किसने रोका है
सोच फिक्र में ढलता है हर एक क्षण जीवन का
नई सुबह को आज तक किसने देखा है
पल पल घटता है आयु अल्पायु में महज
सांसो के घटते मोल को किसने जाना है
अंतिम क्षण कैसा होगा आखिर ये अनुमान
अमरता का वरदान जहां में किसने पाया है
ये सच है कि सभी को जाना है कब कैसे किसने जाना है|
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें