झुकोगे झुकाए जाओगे
डरोगे डराए जाओगे
आवाज उठाओगे तो
धमकाए भी जाओगे
पल पल मरना ठीक नहीं
समझौता करना ठीक नहीं
लड़ते रहो बुराई के ख़िलाफ़
जब तक सांस आखिरी हो
ताकि नजरें खुद से मिला पाओ
यह बेहद जरूरी है तुम्हारे लिए
तुम औरत हो , बहन हो ,बेटी हो
यह मत समझो छींटे तुम पर आएंगी
बेशक आएंगी दोगले समाज का रिवाज है
तुम लड़ना यूँ ही ना हार जाना
क्योंकि नजरें तुम्हे खुद से मिलानी है
यह पुरुष प्रधान समाज है बेशक ताड़ी जाओगी
चुप रहने को बाध्य की जाओगी
तुम ईंट को ईंट से तोड़ना
हाँ तुम औरत हो चाल को चाल से जीतना
प्रतिशोध को चतुराई से जीतना
अपनी कमजोरी को अपनी ढाल बनाना
तब नहीं छू पायेगा ये दोगला समाज
और इसमें ब्याप्त वह कुरीतियाँ
जो तुम पर हावी रही हैं या रह सकती थीं
सिर्फ इसलिए कि तुम एक औरत हो ।।
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