चमन में गुलजार है ,मन में उजाड़ है
धड़कनों में आग है ,राख़-ए-जहान है
फूलों में खुशबू है ,बगिया में बहार है
मुरझाये फूलों की फिर कहाँ बिसात है
आँखों में नमी कहीं जैसे ,गम-ए- सैलाब है
उचटी नींदों में कहीं ,गफलत की नींदे आम है
ख्वाहिशों की चाभी का ,दिल-ए-मकां बंद है
हसरत-ए-जिंदगी का ,खुले में कत्लेआम है
जिंदगी के किस्सों के ,अधूरे से अफसाने हैं
चाहतों के तरकशों में,ख्वाबों का कमान है
जरिया मेहनतों से है ,तकदीर का लिखा टले
चलना अविराम जब तलक न जिंदगी ढले।।
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