कविता लिखी नहीं जाती
वह तो स्वत: ही लिख जाती हैभावनाएँ व्यक्त नहीं की जाती
वह तो स्वमेव व्यक्त हो जाती है
प्रेम किया नहीं जाता,
जीवन की राहो में असमय प्रेम हो जाता है
जीवन काटा नहीं जाता बल्कि
मुश्किलें हमें जीना सिखा देती हैं
जहर पिया नहीं जाता बल्कि दो
कङवे बोल हमें जहर पिला देते हैं
नम्रता सीखी नहीं जाती बल्कि
यह तो हमारे अंतर्मन में मृग कस्तूरी सी छिपी होती है
महान बनने की कोशिश नहीं की जाती
अक्सर हमारे अच्छे कर्म हमें स्वत: ही
महान बना देते हैं
मैं फिर से यही कहूँगी
कविता लिखी नहीं जाती
यह तो स्वत: ही लिख जाती है!
"गायत्री शर्मा"
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