मेरी कविता बन गई मेरी
हृदय गीत की परिभाषाशेरो शायरी भूलकर अब मैं
लिखने लगी अंत:अनुभूति
मेरे दिल की हर एक बात
जुबा जिसे ना बयाँ कर पाए
आँसू जब स्याही बन जाए
कलम हृदय की व्यथा कहे
आँसू अविरल धारा बनकर
जीवन को गतिशील करे
जब चिंतन को विस्तृत किया
महसूस किया पीङा समाज का
कविता मन का दर्पण बनकर
समाज का दारूण व्यथा दिखाए
मैं कामिनी बन प्रेमी रूप को
दर्पण में न निहारूं......
इन आँखो के अश्कों से उपजी
गरीबी दरिद्रता की परिभाषा
मेरी कविता बन गई मेरी
हृदय गीत की 'परिभाषा'!
"गायत्री शर्मा"
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें