संस्कार न्यूज में प्रकाशित लेख
कवयित्रियां कैसी होती हैं दीक्षा ने पूछा ....." हंसी मजाक और ठहाँको के बीच दीक्षा बोली ...'' चलो अब कौन क्या परफॉर्म करेगा सब बताओ एक एक करके !!
गजाला ऑफिस से थकी हारी आई कुछ देर आराम करने को लेटी ही थी कि कवि हृदय की झंकार और गुंजन उसके कानो में मिश्री घोल रही थी।
वह तुरंत उठकर बैठ जाती है कि दोनो सहेलियां उसकी उत्सुकता को देख हंस पड़ती हैं
"हां हम बेवकूफ हैं " घरेलू औरतें हैं हमे नहीं आता पैसों का हिसाब करना "
वाह वाह वाह वाह क्या खूब लिखती हो यार और वो भी इतना संजीदा विषय बहुत खूब.... दीक्षा और गिन्नी की तारीफ सुनकर गजाला हल्की सी मुस्कान लिए पंक्तियां खत्म करती है
अब बारी गिन्नी की आती है सब तालियां बजाते हैं गिन्नी भी सफर से थकी हुई थी कि उसका गला उसका साथ नहीं दे रहा था इस सर्द गर्म मौसम का असर भी इस महफिल को उदास ना होने दिया ।
गिन्नी ने थोड़ा रुककर गीत शुरू किया ...." जो जाम नहीं पीते हैं वो महाकाव्य कई गढ़ देते हैं ना दवा कोई ना हकीम कोई यादों का डोज ही लेते हैं ..." वाह वाह वाह वाह क्या कह दिया तुमने । दीक्षा ने कहा .."!
अगली सुबह ! सुबह के 5 बजे हैं वातावरण में हल्की सी ठंडक है ना सर्दी है ना पूरी तरह गर्मी है इधर ऑल आउट को मच्छरों ने फेल कर रखा हैं ऊपर से लाईट चली गई उफ्फ ...... गजाला बोली अब क्या करें। , गिन्नी ने कहा आ जायेगी लाईट सो जाओ ! अब आंखो में नींद कहां , सबके फोन की बैटरी डाउन पड़ी है अब इंतजार है चार्जिंग का !
समय अपनी गति से बढ़ता जा रहा है सूर्योदय होते ही कुछ खिड़की का उजाला काम आया । वो ठहाके फिर से याद आए जैसे तैसे सब तैयार हुए । दीक्षा बहुत खूब लग रही हो , गिन्नी ने कहा । दीक्षा .... " थैंक्स यार इतनी तारीफ सुनकर पागल हो जाऊंगी ।
गजाला बोली.." कवयित्रियां जींस टॉप पहनती हैं?? नहीं नहीं !! लुक नहीं आएगा ! वो सूट पर शानदार दुपट्टा रखती हैं और उसकी बातों में अपनी बात जोड़ते हुए गिन्नी बोली ...." उनके इयररिंग्स मस्त होते हैं मैचिंग मैचिंग । उसकी बात में अपनी बात शामिल करते हुए दीक्षा बोली ....." और वो बालों को लहराती हुई सिंपल मेकअप करती हैं बस । मैं ऐसे ही जाऊंगी। और फिर से ठहाके भरी महफिल सज गई ।
अब बारी दीक्षा की थी गजाला को छेड़ने लगी अपने शब्दों के उपमाओं से पुनः रौनक लगा दिया । इसी बीच कार्यक्रम जिस जगह पर रखा गया है जाने में समय तो लगता परंतु ना लाईट और ना फोन चार्ज! समस्या ये है कि रील कैसे बने .....
और गिन्नी सोच रही है कि समय से कैसे पहुंचे।
भारत में जुगाड सिस्टम काफी चलता है बस गजाला का दिमाग चल गया और लैपटॉप के चार्ज से फोन कनेक्ट कर दिया ।
उधर गजाला के दोस्त को बिना नहाए ही कार्यक्रम में पहुंचना पड़ा । लाईट नहीं और ठंडे पानी से नहाना उनके समझ से बाहर था। मच्छरों का खौफ ऐसा था कि उसके दोस्त को टायफाइड हो गया था , गजाला भी दवा ले रही थी और गिन्नी एक हफ्ते पहले ही मच्छरों के कहर से उबर पाई थी
लेकिन चुनौतियां उनके रास्ते को और आसान करती गईं !
जहां चाह वहां राह ... बस यही धुन उनके हौसलों का बुलंद आवाज था। गजाला बैठी सोच ही रही थी कि उधर फोन पर फोन और कार्यक्रम का आगाज हो चुका था।
देर से पहुंचने पर सवालों का सामना एक और मसला ! लेट कैसे हुए आप सब ?? अब कहें तो कहें क्या कि इंस्टा रील बनाने के लिए कुछ देर और रुक गए और फोन चार्ज करके ही दम लिया। सभी कवयित्रियां एक दूसरे को देखते हुए चुपचाप अपनी अपनी जगह पर स्थान ग्रहण किया। जिनके बिना कार्यक्रम सूना लग रहा था। अब फिर से हंसी ठहांको के बीच शायराना महफिल आबाद हो गई और सबके चेहरे पर मुस्कान तैर गई ..... दीक्षा को इश्क का हर रंग हरा दिखने लगा तो किसी को हर रंग दिखा । अक्सर प्यार में पड़ा आशिक या माशूका अर्थ अनर्थ नहीं देखते और भावनाएं अपना अस्तित्व गढ़ लेती हैं । कवयित्रियों का आगाज बेहद शानदार रहा।

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