सांसारिक उपलब्धियों के बावजूद एक कोना है इस मानव हृदय में जो अध्यात्म की कमी को महसूस करता है यह सदियों से चला आ रहा है अगर अध्यात्म जीवन की आवश्यकता न होती तो युद्ध क्षेत्र में भगवान अर्जुन को राजविद्या का ज्ञान ना दे रहे होते ......
आध्यात्म की बैसाखी के बिना नर पंगु होता है ,
भौतिकी लाख हो उपलब्धियां क्षण भंगुर होता है
छिपा है अनंत अद्भुत शक्तियां मानव हृदय पट में
कुंडलिनी जागृति से चक्र आवागमन मिटता है ।।
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और सच्चे गुरु की पहचान क्या होती है कैसे हम आप यह जानें की किसकी शरणागति होनी है तो कुछ लक्षण अपने शब्दों में उजागर किया है अध्यात्म के इन गूढ़ रहस्यों को हृदयोंदगार कर। जान गुरु की पहचान कर सकते हैं
कि जगमग जिसका अंतर्मन हो बाहर भीतर स्थितप्रज्ञ हो
सुध हो जिसकी आत्म संयमित जीवों को कर दे जो भय हीन
धर्म संहिता का ज्ञाता हो राम राज्य सा उसका दर हो
नीच अधम पतित मानव का करता जो उद्धार है
देव स्द्रीश चैतन्य महाप्रभु सदगुरु तुम्हे प्रणाम है।।
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