पुष्प तेरी परिभाषा क्या है
जीवन की अभिलाषा क्या है
नित्य निरंतर बढते हुए भी
खुद में इतना निखरता क्यों है
पुष्प तेरी परिभाषा ....
ङाली पर जो तेरा बसेरा है
कीमत इतना महंगा क्यों है
सुंदरता पर बहुत इठलाता
गिरकर खाक में मिलता क्यों है
पुष्प तेरी परिभाषा...
कांटो पर है तेरा बसेरा
इत्र से तेरे निर्मल काया
अच्छे बुरे कर्मो में समर्पित
जाने तूं इतना बेबस क्यो है
पुष्प तेरी परिभाष...
ङोली और अर्थी की सेज पर
तूं ही सबको भाता क्यों है
तेरा जीवन नहीं है तेरा
आत्मसमर्पण करता क्यूं है
पुष्प तेरी परिभाषा क्या है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें