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नश्वर जगत से अमरता की ओर

  

 हम कौन हैं हमारा अस्तित्व क्या है क्या कभी सोचा है जो आज

हमारे अपने हैं जीवन से जुङा हर पल एक रिश्ता है

हमारे गमो मे उन्हे भी बेचैनी है जो नहीं चाहते हमसे बिछङना

ना हमने कभी चाहा उनसे जुदा होना ये कैसा खेल है कुदरत का

सृष्टि का ये नियम कैसा जिसके आगे हमें झुकना ही है

जो आया इस संसार में उसे एक ना एक दिन जाना ही है

नहीं रोक सकते हम उन्हे जाने से जो आज हमारे अपने हैं

ना वो हमे रोक पाएंगे अंतिम यात्रा से फिर क्यों आए हमारे जीवन में

क्षणिक खुशियां लेकर कभी माँ पिता भाई बहन व सगे संबंधी बनकर

अब ये कुटुंब भी खाली ये जीवन भी सूना अंतकाल अब पछताना क्यों है

ये शरीर भी जीर्ण हुआ जिजीविषा भी खत्म हुई काश एक ऐसा लोक होता

जहाँ कभी भी जन्म मरण न होता !  कौन जाने उस धाम को पाने का मार्ग ? ? ?

 जहाँ पहुंचकर दुख, संताप विरह, वेदना से निजात मिल जाता

 एवं पुन: चिरस्थायी रिश्तों से हमारा संबंध जुङ जाता!

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