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कृष्ण


बाल रूप मोरे मन भावा

अति सुंदर मनमोहन प्यारा

मनमोहक तेरी छवि निराली

बंसी की धुन वो कदंब की ङारि

बाल- ग्वालों संग झुंङ बनाकर

नंद की नगरी में उधम मचावे

निगुणा भी तेरा रूप निहारे

माखनचोर पर बलि बलि जावे

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